अमेरिका को झटका: शी जिनपिंग ने ट्रंप के ‘शांति डील’ दावे को खारिज किया, थाई-कंबोडिया विवाद में चीन की भूमिका पर जोर
बुसान, 31 अक्टूबर 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एशिया दौरे के दौरान दक्षिण कोरिया के बुसान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई मुलाकात ने अमेरिका को झटका दिया। ट्रंप ने थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद में ‘शांति डील’ का श्रेय लेने का दावा किया था, लेकिन शी ने इसे खारिज कर चीन की भूमिका पर जोर दिया। यह घटना US-चीन प्रतिस्पर्धा को उजागर करती है। आखिर क्या था पूरा मामला? आइए, तीन हिस्सों में समझते हैं।
बुसान शिखर सम्मेलन में ट्रंप-शी मुलाकात
30 अक्टूबर को बुसान में APEC शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और शी की द्विपक्षीय बैठक हुई। ट्रंप ने इसे “शून्य से 10 पर 12 अंक” का सफल बताया। उन्होंने थाईलैंड-कंबोडिया ‘शांति समझौते’ में अपनी भूमिका का जिक्र किया, जो मलेशिया में 26 अक्टूबर को हस्ताक्षरित हुआ। ट्रंप ने कहा कि चीन इसमें शामिल नहीं था। लेकिन शी ने तुरंत खंडन किया। उन्होंने ट्रंप के गाजा युद्धविराम में “महत्वपूर्ण योगदान” की सराहना की, लेकिन थाई-कंबोडिया पर कहा कि चीन ने “अपने तरीके से” दोनों देशों को सीमा विवाद सुलझाने में मदद की। शी ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बंद कमरे की बातचीत का हवाला दिया, जो तनाव के चरम पर हुई थी। यह मुलाकात व्यापार, ताइवान और हॉन्गकॉन्ग मुद्दों पर भी केंद्रित रही।
थाईलैंड-कंबोडिया विवाद की पृष्ठभू
मिथाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवाद 1950 के दशक से चला आ रहा है, जो प्रीह विहार मंदिर (Preah Vihear) और आसपास के क्षेत्र पर केंद्रित है। 1904-07 के फ्रेंको-सीमेज संधियों से सीमा तय हुई, लेकिन फ्रेंच नक्शों ने मंदिर को कंबोडिया में दिखाया। 1962 में ICJ ने कंबोडिया के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन आसपास का 4.6 वर्ग किमी क्षेत्र विवादित रहा। 2008 में यूनेस्को ने मंदिर को विश्व धरोहर घोषित किया, जिससे झड़पें भड़कीं। 2025 में मई-जुलाई में तनाव चरम पर पहुंचा—सीमा पर गोलीबारी में दर्जनों मारे गए। 24 जुलाई को ता मुएन थॉम मंदिर के पास भारी संघर्ष हुआ। ट्रंप के मलेशिया दौरे पर थाई PM अनुटिन चारनवीराकुल और कंबोडिया PM हुन मानेत ने ‘जॉइंट डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर किए, जिसे ट्रंप ने ‘महत्वपूर्ण कदम’ कहा। लेकिन थाई विदेश मंत्री ने इसे ‘शांति का रास्ता’ बताया।
चीन का खंडन और US-चीन प्रतिस्पर्धा
शी का बयान दक्षिण-पूर्व एशिया में US-चीन प्रभाव की जंग को दर्शाता है। चीन ने वांग यी के माध्यम से दोनों देशों को शांत करने में भूमिका निभाई, जबकि ट्रंप ने इसे अपना ‘पीस ब्रोकर’ क्रेडिट लिया। कंबोडिया ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया, लेकिन थाईलैंड ने इसे सीमित रखा। यह घटना ASEAN क्षेत्र में चीन के मजबूत संबंधों को उजागर करती है, जहां बीजिंग ने व्यापार और सुरक्षा बंधन बनाए हैं। ट्रंप का एशिया दौरा व्यापार डील्स पर केंद्रित था, लेकिन शी का जवाब US को झटका दे गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में ‘चाइना+1’ रणनीति को प्रभावित कर सकता है।