UP Cabinet Clears Township Policy: योगी सरकार ने दो दशक पुरानी ‘मुलायम नीति’ को दी हरी झंडी, 28 मेगा परियोजनाएं देंगी नई रफ़्तार।
UP Cabinet Clears Township Policy: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति और शहरी विकास (Urban Development) की दिशा को बदलने वाला एक बड़ा फैसला योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की कैबिनेट बैठक में सामने आया है। सरकार ने दो दशक पहले मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) सरकार द्वारा लाई गई बहुप्रतीक्षित इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति (Integrated Township Policy) को पुनः मंजूरी देकर 28 वर्षों से अटकी मेगा परियोजनाओं को नई ज़िंदगी दे दी है। इस नीति में न्यूनतम भूमि सीमा (Minimum Land Limit) कम करने से लेकर विकासकर्ताओं (Developers) को अतिरिक्त समय देने तक कई महत्वपूर्ण रियायतें (Concessions) दी गई हैं। यह निर्णय न केवल रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा गति देगा, बल्कि शहरों में आवासीय मांग (Housing Demand) पूरी होने की उम्मीद को भी बढ़ाएगा। इस फैसले के पीछे का कारण 4500 करोड़ रुपये के रुके निवेश को गति देना है, जो प्रदेश के रियल एस्टेट (Real Estate) और शहरी विकास को नई दिशा देगा। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से…
दो दशक पुरानी नीति की विरासत और रुकावटों की पृष्ठभूमि
साल 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की सरकार ने इंटीग्रेटेड टाउनशिप नीति (Integrated Township Policy) लागू की थी, जिसका उद्देश्य 25 से 500 एकड़ भूमि पर आधुनिक आवासीय टाउनशिप (Townships) विकसित करना था। इस नीति के तहत लखनऊ (Lucknow), आगरा (Agra), कानपुर (Kanpur), गाजियाबाद (Ghaziabad) समेत कई शहरों में कुल 40 परियोजनाएं (Projects) प्रस्तावित की गई थीं। हालांकि, मायावती (Mayawati) और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के कार्यकाल में भी नियमों की कठोरता, भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) में दिक्कतें और विकासकर्ताओं की वित्तीय चुनौतियों (Financial Challenges) के कारण यह नीति गति नहीं पकड़ पाई। इसका दुखद परिणाम यह हुआ कि 40 में से केवल पाँच टाउनशिप (Townships) ही पूरी हो सकीं, जबकि 28 परियोजनाएं (Projects) वर्षों से अधर में लटकी रहीं। योगी सरकार (Yogi Government) ने इसी अटकी विरासत को आगे बढ़ाने और रुके हुए निवेश (Stuck Investment) को सक्रिय करने के लिए हस्तक्षेप किया।
भूमि सीमा घटी, विकासकर्ताओं के लिए रियायत के दरवाजे खुले
योगी सरकार (Yogi Government) ने रुकी हुई परियोजनाओं को गति देने के लिए नीति में दो सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सबसे पहले, न्यूनतम 25 एकड़ भूमि (Land) की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। नई नीति के तहत, अब 12.50 एकड़ भूमि पर भी इंटीग्रेटेड टाउनशिप (Integrated Township) विकसित की जा सकेगी। यह रियायत उन परियोजनाओं को ऊर्जा देगी जो छोटी भूमि की उपलब्धता न होने के कारण अटकी हुई थीं। दूसरा बड़ा बदलाव यह है कि विकासकर्ताओं को आसपास की 10% अतिरिक्त भूमि परियोजना में शामिल करने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही, 25 एकड़ तक की परियोजना को पूरा करने के लिए तीन वर्ष और इससे बड़ी परियोजना के लिए पाँच वर्ष की समयसीमा तय की गई है। अगर विकासकर्ता अतिरिक्त समय चाहते हैं, तो उन्हें ₹80,000 प्रति एकड़ की दर से शुल्क (Fees) देना होगा।
सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और सुनियोजित शहरीकरण पर जोर
कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) के बाद, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना (Suresh Kumar Khanna) ने नई नीति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नई व्यवस्था विकासकर्ताओं (Developers) को अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने की पूरी सुविधा देगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत डीपीआर (Detail Project Report) में संशोधन का अधिकार भी दिया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यवाही (Administrative Process) सरल हो जाएगी। मंत्री खन्ना (Suresh Kumar Khanna) ने दावा किया कि अधूरी टाउनशिप (Township) परियोजनाओं को पूरा कराने की यह नीति प्रदेश में सुनियोजित शहरीकरण (Planned Urbanization) का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि इससे रुके हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और शहरों पर पड़ रहे आवासीय दबाव (Housing Pressure) में कमी आएगी। वहीं, सात निष्क्रिय (Inactive) पड़ी परियोजनाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancelled) कर दिया गया है, जिससे प्रशासनिक बोझ कम हुआ है।
28 अधूरी परियोजनाओं को सक्रिय करने की आगे की प्रक्रिया
नई नीति के लागू होने के साथ ही, 28 अधूरी परियोजनाओं (Incomplete Projects) को दोबारा सक्रिय करने की प्रक्रिया अब शुरू हो गई है। शासनादेश (Government Order) जारी होने के बाद, इन सभी परियोजनाओं का टाउनशिप नीति—2023 के अनुरूप पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) किया जाएगा। विकासकर्ताओं (Developers) को परियोजना की 80% भूमि स्वयं उपलब्ध करानी होगी। शेष 20% भूमि, आवश्यकता अनुसार, सरकार सड़क, एसटीपी (STP) और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं (Public Amenities) के लिए अधिग्रहित (Acquire) कर सकती है। सरकार का मुख्य लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में अधूरी टाउनशिप्स को पूरा करके शहरों में मध्यम और उच्च वर्ग की आवासीय मांग (Housing Demand) को पूरा करना है। यह कदम न केवल रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) को एक बड़ा प्रोत्साहन (Boost) देगा, बल्कि प्रदेश में संगठित और योजनाबद्ध शहरी विकास (Organized Urban Development) का मार्ग भी मजबूत करेगा।