यूपी: रामपुर-सिद्धार्थनगर में बदले गए बीएसए, जौनपुर सीएमओ का रुका प्रमोशन; तीन गैरहाजिर डॉक्टरों पर गिरी गाज
लखनऊ, 5 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। राज्य सरकार ने रामपुर और सिद्धार्थनगर जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को बदल दिया है, जबकि जौनपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का प्रमोशन रोक दिया गया है। इसके साथ ही, तीन डॉक्टरों पर अनुपस्थिति के कारण सख्त कार्रवाई की गई है। इन फैसलों से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
रामपुर और सिद्धार्थनगर में बीएसए का तबादला
प्रदेश के शिक्षा विभाग में फेरबदल के तहत रामपुर और सिद्धार्थनगर जिलों के बीएसए को तत्काल प्रभाव से बदला गया है। सूत्रों के अनुसार, रामपुर के बीएसए को उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर हटाया गया है, और उनकी जगह नए अधिकारी की नियुक्ति की गई है। वहीं, सिद्धार्थनगर में भी बीएसए को बदलकर जिले में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। यह तबादले शिक्षा विभाग में चल रही व्यापक समीक्षा का हिस्सा माने जा रहे हैं, जिसके तहत अधिकारियों के कामकाज की निगरानी की जा रही है।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन तबादलों का मकसद स्कूलों में बेहतर प्रबंधन और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। रामपुर और सिद्धार्थनगर में हाल के दिनों में बेसिक शिक्षा से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। नए बीएसए से उम्मीद की जा रही है कि वे जिले में शैक्षिक सुधारों को गति देंगे।
जौनपुर सीएमओ का प्रमोशन रोका गया
जौनपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के प्रमोशन पर भी सरकार ने रोक लगा दी है। सूत्रों के मुताबिक, सीएमओ के खिलाफ कुछ शिकायतें और उनके कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही के आरोपों के चलते यह फैसला लिया गया। प्रमोशन रोकने का यह कदम स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जौनपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की कमी और चिकित्सकों की अनुपस्थिति जैसी समस्याएं आम हैं। इन शिकायतों की जांच के बाद सरकार ने सीएमओ के प्रमोशन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस मामले में विस्तृत जांच की जा रही है, और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

तीन गैरहाजिर डॉक्टरों पर कार्रवाई
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है। इसी क्रम में तीन डॉक्टरों पर गैरहाजिरी के चलते कड़ी कार्रवाई की गई है। ये डॉक्टर अपनी ड्यूटी से लगातार अनुपस्थित पाए गए थे, जिसके बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में दोषी पाए जाने पर इन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, ये डॉक्टर अलग-अलग जिलों में तैनात थे और इनकी अनुपस्थिति से मरीजों को काफी परेशानी हुई थी। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए निलंबन के साथ-साथ इनके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वालों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का सख्त रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल के दिनों में प्रशासनिक और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी ईमानदारी से करें। रामपुर और सिद्धार्थनगर में बीएसए के तबादले, जौनपुर सीएमओ के प्रमोशन पर रोक और गैरहाजिर डॉक्टरों पर कार्रवाई इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन फैसलों से सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि तबादलों और कार्रवाइयों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर सुधारों को लागू करने की जरूरत है, ताकि इन बदलावों का असर आम जनता तक पहुंच सके।
