• February 18, 2026

New Delhi: Samajwadi Party President Akhilesh Yadav addresses during “NDTV Yuva 2018”, in New Delhi on Sept 16, 2018. (Photo: Amlan Paliwal/IANS)

यूपी की राजनीति का पारा अचानक बढ़ गया है। बुआ-बबुआ और निशाने पर है 2027 की कुर्सी।

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने रविवार को पीडीए होली मिलन कार्यक्रम में जो कहा उसने यूपी की राजनीति के पुराने जख्मों पर मरहम और नई संभावनाओं को जन्म दे दिया है। सवाल उठने लगे कि क्या लखनऊ में होली के गुलाल से पहले ही गठबंधन का नया रंग चढ़ने वाला है?

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सपा में आना सिर्फ एक जॉइनिंग है या कुछ और?

दरअसल नसीमुद्दीन सिद्दीकी कभी मायावती के सिपा सलार और बसपा सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री रहे। अब साइकिल पर सवार हो चुके हैं। जानकारों की मानें तो यह मायावती को अखिलेश का वो सॉफ्ट सिग्नल है जो बता रहा है कि 2027 के लिए बिसाद बिछनी शुरू हो गई है। लेकिन सबसे बड़ी सुर्खियां यह रही जब 15 फरवरी को 15,000 लोगों की मौजूदगी में यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश ने ऐलान किया कि बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का यह रिश्ता गहरा होता जा रहा है। मैं उन तमाम साथियों को कहना चाहता हूं के बहुजन समाज और समाजवादी पार्टी का ये रिश्ता गहरा होता जा रहा है और गहरा होगा।

यह पीडीए का प्रेम प्रसार समारोह है। कन्नौज सांसद के इस बयान के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच क्या गठबंधन होगा क्योंकि इतिहास के पन्ने खंगालने में पता चलता है कि 1993 में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने साथ मिलकर भाजपा के विजय रथ को रोका था। लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड से एक दूसरे के दुश्मन बन गए। 2019 के लोकसभा चुनाव में बुआ बबुआ की जोड़ी फिर साथ आई। लेकिन नतीजे निराशाजनक होने पर मायावती ने गठबंधन तोड़ दिया। अब सवाल बड़ा है क्या गेस्ट हाउस कांड की कड़वाहट और 2019 की नाकामयाबी को भुलाकर मायावती फिर अखिलेश के साथ आएंगी या फिर अखिलेश यादव बसपा के कैडर को तोड़कर खुद को दलितों, पिछड़ों का इकलौता मसीहा साबित करना चाहते हैं।

इन सब बातो को मद्देनज़र रखते हुए बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती के एक बड़े एलान ने तूफ़ान ला दिया है। मायावती ने आज यानि बुधवार को लखनऊ प्रेस कांफ्रेंस क दौरान कहा की किसी भी भ्रामक बातो पर ध्यान न दे , उन्होने स्पष्ट किया की आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा ‘एकला चलो’ की नीति अपनाएगी और प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपने ही प्रत्याशी उतारेगी.

गठबंधन को लेकर क्या कुछ कहा गया ;

उन्होने कहा गठबंधन ली आ रही गलत बातो पर बिलकुल ध्यान दे उन्होने गेस्ट हाउस कांड को भी ले कर अपनी बाते रखी जिस से साफ़ है की मायावती इस बार 2027 क विधान सभा क चुनाव को ले कर अकेले ही खड़े होने का फैंसला किया है और आप को बता दे की वो 2027 क चुनाव को ले कर काफी तैयारी करती नज़र आई जब अपने भतीजे को रैली और तामम चीजे करते नज़र आई।

इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए मायावती ने कहा, “ऐसी कोई भी चर्चा जो चल रही है कि गठबंधन हो रहा है, वह बिल्कुल भ्रामक है. जो गठबंधन को लेकर उल्टी खबरें आती हैं उस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है.” मालूम हो कि मायावती ने अपने पिछले कई बयानों में कहा था कि गठबंधन करने से बसपा का वोट तो दूसरी पार्टियों को ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन दूसरी पार्टियों का वोट बसपा को नहीं मिल पाता.

इस ऐलान के साथ ही मायावती ने भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन दोनों के लिए चुनौती पेश कर दी है. उत्तर प्रदेश में अब मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है जिससे कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं. मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों में न आएं और केवल पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान दें.

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