सुप्रीम कोर्ट ने असम सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, हाईकोर्ट जाने की सलाह दी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को गुवाहाटी हाईकोर्ट में अपील करने की सलाह दी और साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी भी मामले को सुलझाने का ‘प्लेग्राउंड’ नहीं है।
कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट को इस मामले में तुरंत सुनवाई करने और योग्यता के आधार पर उचित आदेश जारी करने का निर्देश दिया। बेंच ने याचिकाकर्ता को सिस्टम पर भरोसा रखने की सलाह देते हुए कहा, “जब संविधान के तहत हाईकोर्ट के पास आपकी याचिका पर उचित आदेश जारी करने की शक्ति है, तो आप पहले वहां जाएं। हम सुनेंगे, लेकिन हाईकोर्ट होकर आइए।”वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलील और कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हिमंता बिस्वा शर्मा ने असम, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीएम एक शपथ-धारक पदाधिकारी हैं और वे खुलेआम संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने जवाब में कहा, “हम सिर्फ हाईकोर्ट से गुजारिश कर सकते हैं कि यह महत्वपूर्ण मामला है और वो योग्यता के मुताबिक सुनवाई करें।”क्या है पूरा मामला?
याचिका में हिमंता बिस्वा शर्मा के ‘मियां मुस्लिम’ बयानों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो का हवाला देते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच की मांग की गई थी। याचिका कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) और सीपीआई नेता एनी राजा ने दाखिल की थी।
हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें असम के मुख्यमंत्री को मुस्लिम टोपी पहने कुछ लोगों पर बंदूक से निशाना साधते हुए दिखाया गया था। वीडियो के साथ कैप्शन था – “कोई दया न करें।” इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर भारी बवाल हुआ। बाद में बीजेपी के आधिकारिक हैंडल से वीडियो हटा दिया गया। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा बैकफुट पर नजर आए थे।अब यह मामला गुवाहाटी हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए जाएगा, जहां याचिकाकर्ता को अपनी दलीलें पेश करने का मौका मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पहले हाईकोर्ट स्तर पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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