सपा सांसद रामजीलाल सुमन का करणी सेना को करारा जवाब: “टूट जाऊंगा या झुक जाऊंगा, यह उनकी गलतफहमी”
आगरा, 28 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर तनाव का माहौल गरमाया हुआ है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन और क्षत्रिय करणी सेना के बीच चल रहा विवाद नया मोड़ ले चुका है। रविवार को अलीगढ़ में सुमन के काफिले पर हुए हमले के बाद सोमवार को उन्होंने मीडिया से बातचीत में योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सुमन ने कहा, “लगता है कि राज्य सरकार का लचीलापन प्रदेश का माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों को संरक्षण दे रहा है। दो-तीन बार हमले की कोशिश की गई, लेकिन हम पर इसका कोई प्रभाव नहीं। वो लोग सोचते हैं कि इन सब से मैं टूट जाऊंगा या झुक जाऊंगा, तो यह उनकी गलतफहमी है।” इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
विवाद की जड़: राणा सांगा पर बयान
रामजीलाल सुमन का यह विवाद मार्च 2025 में शुरू हुआ, जब उन्होंने राज्यसभा में मेवाड़ के शासक राणा सांगा को लेकर एक टिप्पणी की थी। सुमन ने कथित तौर पर कहा था कि राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी को हराने के लिए बाबर को आमंत्रित किया था, जिसे करणी सेना ने अपमानजनक माना। इस बयान के बाद से करणी सेना ने सुमन के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन किए। मार्च में आगरा में सुमन के घर पर हमला हुआ, जिसमें करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे सुनियोजित साजिश करार दिया था।
अलीगढ़ में काफिले पर हमला
ताजा घटना रविवार, 27 अप्रैल 2025 को अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा के पास हुई, जब सुमन आगरा से बुलंदशहर के सुनहेरा गांव एक दलित परिवार से मिलने जा रहे थे। इस परिवार में हाल ही में एक दलित महिला की थार गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई थी। सुमन के काफिले पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पत्थर और टायर फेंके, जिससे काफिले की कई गाड़ियां आपस में टकराकर क्षतिग्रस्त हो गईं। इस हमले में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इलाके में घंटों अफरा-तफरी का माहौल रहा।
करणी सेना के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए कहा, “हमें दुख है कि सुमन एक बार फिर बच गए। जब तक वो माफी नहीं मांगेंगे, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।” इस बयान ने विवाद को और हवा दी। अलीगढ़ पुलिस ने मामले में करणी सेना के जिला संयोजक कृष्णा ठाकुर सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन उन्हें बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

सुमन का सरकार पर हमला
सोमवार को मीडिया से बातचीत में सुमन ने योगी सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मैंने तीन दिन पहले ही पुलिस, प्रशासन और खुफिया तंत्र को सूचना दी थी कि मुझे बुलंदशहर जाना है। इसके बावजूद मेरे काफिले पर जानलेवा हमला हुआ। यह साफ है कि सरकार अराजक तत्वों को संरक्षण दे रही है।” सुमन ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी उनकी हत्या की साजिश रच रही है। उन्होंने कहा, “12 अप्रैल को गढ़ी रामी में करणी सेना ने पुलिस के सामने तलवारें और हथियार लहराए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह सरकार की मिलीभगत को दर्शाता है।”
सुमन ने करणी सेना को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “मैंने तीन सेनाओं के बारे में सुना था—थल सेना, वायु सेना और नौ सेना। यह करणी सेना कहां से आ गई? अगर ये इतने ही वीर हैं, तो देश की सरहद पर जाएं और चीन से हमारी जमीन वापस लाएं।” यह बयान सुमन ने पहले भी आंबेडकर जयंती के मौके पर दिया था, जिसने करणी सेना को और भड़काया था।
सपा का सरकार पर पलटवार
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “सुनियोजित साजिश” करार दिया। उन्होंने कहा, “रामजीलाल सुमन के काफिले पर टायर और पत्थर फेंककर जो हमला हुआ, वह प्राणांतक दुर्घटना में बदल सकता था। यह एक आपराधिक कृत्य है। क्या योगी सरकार का बुलडोजर अब बेदम हो गया है, या यह सब सरकार की रजामंदी से हो रहा है?” अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे बीजेपी का हाथ है, जो दलित और पिछड़े वर्गों को डराने की कोशिश कर रही है।
सपा की विधायक और अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने भी सुमन के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री कहते हैं कि यूपी से गुंडे और माफिया खत्म हो चुके हैं, तो फिर ये लोग कौन हैं जो एक दलित सांसद पर हमला कर रहे हैं?”
करणी सेना का रुख
करणी सेना ने सुमन से राणा सांगा पर दिए बयान के लिए माफी की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ने कहा, “जब तक सुमन माफी नहीं मांगेंगे, हमारा विरोध जारी रहेगा।” करणी सेना का कहना है कि सुमन का बयान राजपूत समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। संगठन ने पहले भी फिल्म ‘पद्मावत’ और राजपूत आरक्षण जैसे मुद्दों पर हिंसक प्रदर्शन किए हैं।
सियासी माहौल पर असर
इस घटना ने उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल को और गरमा दिया है। सपा इसे दलित विरोधी मानसिकता से जोड़कर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। योगी सरकार पर पहले से ही कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, और यह घटना विपक्ष के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गई है।
कानूनी कार्रवाई
अलीगढ़ पुलिस ने हमले के सिलसिले में 15 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। गभाना थाने में दर्ज तहरीर में सपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने खेरेश्वर चौकी इंचार्ज और बीट कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया है, जबकि थाना प्रभारी लोधा के खिलाफ जांच शुरू की गई है।
सुमन का अडिग रवैया
सुमन ने अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा, “मैंने जो कहा, वह इतिहास के आधार पर कहा। मुझे बीजेपी से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। मैं बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों और संविधान के रास्ते पर चलता हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने समुदाय के लिए लड़ते रहेंगे और किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं हैं।
आगे क्या?
यह विवाद अभी शांत होने के आसार नहीं दिख रहे। करणी सेना ने सुमन के खिलाफ विरोध तेज करने की धमकी दी है, जबकि सपा इसे दलित उत्पीड़न का मुद्दा बनाकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी को घेरने की रणनीति बना रही है। इस बीच, कानून-व्यवस्था पर सवाल और सियासी बयानबाजी उत्तर प्रदेश का माहौल और गर्माएंगे।