• January 1, 2026

Russia-India Diplomacy: भारत-रूस दोस्ती पर पुतिन की पश्चिम को सीधी चुनौती, चीन ने भी बताया रणनीतिक ताकत

दुनिया की मौजूदा राजनीति इस समय दो स्पष्ट गुटों में विभाजित होती नजर आ रही है। एक ओर अमेरिका (USA) और उसके पश्चिमी सहयोगी देश खड़े हैं, तो दूसरी ओर रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) एक नई वैश्विक धुरी बनाने में लगे हैं। ऐसे माहौल में पुतिन की भारत (India) यात्रा ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। इस दौरे की गूंज अब पड़ोसी देश चीन (China) तक सुनाई दे रही है, जहां के सरकारी अखबार और विशेषज्ञ इस यात्रा को पश्चिमी देशों के लिए एक कड़ा और सीधा संदेश बता रहे हैं। अमेरिका (USA) लगातार भारत पर रूसी तेल खरीद रोकने का दबाव बना रहा है, लेकिन पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान देकर पश्चिमी दबाव को दरकिनार कर दिया है। आखिर इस यात्रा को चीन क्यों इतनी गंभीरता से देख रहा है और इसका वैश्विक सत्ता संतुलन के लिए क्या बड़ा मतलब है? तो चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है, जानते हैं विस्तार से…

दो ध्रुवों में बंटी वर्तमान वैश्विक राजनीति

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य अभूतपूर्व तनाव और ध्रुवीकरण (Polarization) का गवाह बन रहा है। यूक्रेन संघर्ष के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस (Russia) पर लगाए गए भारी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वैश्विक तनाव अपने चरम पर है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और रूस विरोधी रुख के साथ पश्चिमी ब्लॉक का नेतृत्व कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रूस इन प्रतिबंधों का मुकाबला अपनी रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करके कर रहा है। इसी बीच एशिया (Asia) की दो महाशक्तियां—भारत (India) और चीन (China)—का रूस के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखना पश्चिमी ताकतों के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में पुतिन की भारत यात्रा को केवल एक द्विपक्षीय मुलाकात नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में संतुलन स्थापित करने वाला एक निर्णायक रणनीतिक संकेत माना जा रहा है।

चीन की सरकारी मीडिया ने बताया ‘रणनीतिक मजबूती’

चीन (China) के मुखपत्र माने जाने वाले सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स (Global Times) ने राष्ट्रपति पुतिन (Vladimir Putin) की भारत यात्रा को रूस (Russia) की रणनीतिक मजबूती का बड़ा प्रमाण बताया है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और राष्ट्रपति पुतिन ने रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार विस्तार, उभरती तकनीक और इंडो-पैसिफिक तथा यूरेशिया (Eurasia) क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति जैसे अति-महत्वपूर्ण वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन चर्चा की। ग्लोबल टाइम्स ने यह भी दावा किया कि दोनों देश लगभग 10 सरकारी समझौतों और 15 से अधिक महत्वपूर्ण बिजनेस डील पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब यूरोपीय आयोग (European Commission) रूसी फंड्स को लेकर और सख्त प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है। इसलिए, पुतिन का भारत आना पश्चिमी देशों की प्रतिबंध नीति के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

‘बाहरी दबाव में नहीं झुकेगी भारत-रूस साझेदारी’

चीन के प्रतिष्ठित विदेश मामलों के विश्वविद्यालय (China Foreign Affairs University) के प्रोफेसर ली हाईडोंग (Li Haidong) ने ग्लोबल टाइम्स (Global Times) से बात करते हुए इस साझेदारी पर अपनी राय दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत-रूस संबंध बेहद रणनीतिक हैं और ये किसी भी बाहरी दबाव या तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को झेलने की पर्याप्त क्षमता रखते हैं। प्रोफेसर ली के अनुसार, यह मजबूत साझेदारी पूरी दुनिया को यह संकेत देती है कि न तो भारत (India) और न ही रूस (Russia) अपनी विदेश नीति पश्चिमी दबाव के आधार पर तय करने वाले हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पश्चिमी देशों के व्यापक प्रतिबंध रूस को कमजोर करने में विफल रहे हैं। दूसरी ओर, न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) जैसे पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने भी स्वीकार किया कि अमेरिका (USA) द्वारा रूसी तेल आयात रोकने की बार-बार की गई प्रतिबंधों की चेतावनी के बावजूद, भारत (India) अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए अपने रुख पर मजबूती से टिका हुआ है।

राष्ट्रीय मुद्रा में लेनदेन और पुतिन का पीएम मोदी पर बयान

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने सार्वजनिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) एक ऐसे नेता हैं जो किसी भी बाहरी दबाव में आने वाले नहीं हैं। पुतिन ने यह भी पुष्टि की कि भारत-रूस के रक्षा और व्यापार संबंध अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि दोनों देशों के बीच 90 प्रतिशत से अधिक लेनदेन अब राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) में हो रहा है, जिसने अमेरिकी डॉलर (US Dollar) पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। यह कदम वैश्विक वित्तीय प्रभुत्व (Global Financial Dominance) के खिलाफ एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में इन बहुआयामी समझौतों के पूर्ण रूप से लागू होने से पश्चिमी देशों की रणनीतियों और प्रतिबंधों पर सीधा असर पड़ना तय है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस पर नजर गड़ाए हुए है कि पुतिन की यह भारत यात्रा वैश्विक सत्ता और आर्थिक संतुलन को किस दिशा में मोड़ती है।

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