रिंकू सिंह के पिता खचंद्र सिंह का निधन: टी20 वर्ल्ड कप के बीच परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, स्टेज-4 लिवर कैंसर से हारी जंग
नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा, 27 फरवरी 2026: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। उनके पिता खचंद्र सिंह (Khanchand Singh) का आज सुबह ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में स्टेज-4 लिवर कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद निधन हो गया। यह खबर न सिर्फ क्रिकेट जगत बल्कि लाखों संघर्षशील लोगों के दिल को छू गई है, क्योंकि खचंद्र सिंह की जिंदगी बेटे के सपनों को पंख देने वाली एक मिसाल थी।
खचंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एलपीजी गैस सिलेंडर सप्लाई का काम करते थे। सीमित आय, बड़ा परिवार और रोजमर्रा की मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी मेहनत से समझौता नहीं किया। कई बार हालात इतने कठिन हो जाते थे कि छोटे रिंकू को भी पिता के साथ सिलेंडर पहुंचाने में मदद करनी पड़ती थी। फिर भी, उन्होंने बेटे के क्रिकेट जुनून को कभी नहीं रोका। सख्ती जरूर थी, लेकिन सपनों को कुचलने वाली सख्ती कभी नहीं।
रिंकू सिंह ने कई इंटरव्यू में बताया है कि पिता खुलकर तारीफ नहीं करते थे और मैदान पर मैच देखने भी कम ही जाते थे। उनकी सख्ती जीवन की कठिनाइयों के लिए तैयारी थी, ताकि बेटा कभी हार न माने। रिंकू के खेल में जो संयम, विनम्रता और कभी न हार मानने वाली भावना दिखती है, उसकी जड़ें इसी पिता की सीख में हैं। उन्होंने हमेशा कहा कि क्रिकेट हो या कोई और काम, मेहनत और अनुशासन कभी न छोड़ना।
टी20 वर्ल्ड कप के बीच आई दुखद खबररिंकू सिंह इस समय भारत की टी20 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। पिता की तबीयत बिगड़ने पर वे कुछ दिन पहले टीम कैंप छोड़कर घर लौटे थे, लेकिन हालत न सुधरने पर वे वापस टीम में शामिल हो गए। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच से ठीक पहले यह दुखद खबर आई। पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, “श्री खचंद्र सिंह जी के निधन की खबर से बहुत दुख हुआ। रिंकू और उनके परिवार के लिए यह बहुत मुश्किल वक्त है। मेरी हार्दिक संवेदनाएं और प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।”क्रिकेट जगत और फैंस ने भी इस दुख में रिंकू के साथ खड़े होने का संदेश दिया है। रिंकू सिंह ने अपने संघर्षपूर्ण सफर से करोड़ों युवाओं को प्रेरित किया है, और आज उनका यह व्यक्तिगत नुकसान हर किसी को भावुक कर रहा है।
ओम शांति। रिंकू सिंह और उनके परिवार को इस दुख की घड़ी में ढेर सारी ताकत और हिम्मत मिले