भारतीय सेना के लिए ‘ड्रोन कैचर सिस्टम’ की खरीद शुरू, कम RCS वाले दुश्मन ड्रोनों को जाल में फंसाएगा; RFI जारी
नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026: बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए उन्नत ड्रोन कैचर सिस्टम की खरीद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंत्रालय ने इस संबंध में सूचना अनुरोध (Request for Information – RFI) जारी किया है। यह सिस्टम विशेष रूप से कम रडार क्रॉस सेक्शन (Low RCS) वाले स्टेल्थ ड्रोनों और स्वॉर्म ड्रोनों से निपटने के लिए डिजाइन किया जाएगा, जो पारंपरिक रडार से आसानी से बच निकलते हैं।
रक्षा मंत्रालय ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने सिस्टम खरीदे जाएंगे, लेकिन प्रस्तावित सिस्टम तीन प्रमुख कंपोनेंट्स पर आधारित होगा:
- ड्रोन सेंसर
यह सेंसर एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन की जाने वाली एरे (AESA) या इससे बेहतर तकनीक पर आधारित होगा। यह 360 डिग्री कवरेज प्रदान करेगा और बड़े हवाई क्षेत्र की निगरानी कर सकेगा। सेंसर कम से कम 20 ड्रोनों को एक साथ पहचान और ट्रैक करने में सक्षम होगा। खास बात यह है कि यह 0.01 वर्ग मीटर RCS वाले छोटे लक्ष्यों को कम से कम 4 किलोमीटर दूर से डिटेक्ट कर सकेगा। सेंसर खुद खतरे की प्राथमिकता तय कर ड्रोन कैचर को जानकारी भेजेगा। - ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (GCS)
यह पूरे सिस्टम का कमांड सेंटर होगा। GCS ड्रोन सेंसर से प्राप्त जानकारी को सुरक्षित डेटा लिंक के जरिए ड्रोन कैचर तक पहुंचाएगा। यह दुश्मन ड्रोन की टेलीमेट्री (उड़ान डेटा) दिखाएगा और माइक्रोप्रोसेसर के जरिए हमले की गणना करेगा। कमांडर लैपटॉप या टैबलेट इंटरफेस से रियल-टाइम में निगरानी और नियंत्रण कर सकेंगे। - ड्रोन कैचर
यह पूरी तरह स्वचालित होगा। GCS से जानकारी मिलते ही यह खुद लक्ष्य की ओर बढ़ेगा और नेट (जाल) फेंककर दुश्मन ड्रोन को पकड़ लेगा, जिससे वह निष्क्रिय हो जाएगा – ठीक मछली पकड़ने के जाल की तरह। सिस्टम अकेले या बड़े इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा बनकर काम कर सकेगा। इसमें उच्च स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) क्षमता होगी, जिसमें जैमर शामिल होगा। जैमर RF डिनायल, GPS/GNSS सिग्नल ब्लॉक या स्पूफिंग से ड्रोन को गिरा देगा (सॉफ्ट किल)। साथ ही फिजिकल नेट से हार्ड किल भी संभव होगा। विभिन्न फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करने की क्षमता इसे और प्रभावी बनाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर से सीख: बढ़ती जरूरत
रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल के वर्षों में कम RCS और स्वॉर्म ड्रोनों का खतरा तेजी से बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025 में पाकिस्तान समर्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले) के दौरान भी ऐसे ड्रोनों का इस्तेमाल देखा गया। भारतीय सिस्टम ने ज्यादातर ड्रोनों को रोक लिया, लेकिन कुछ LoC पार करने में सफल रहे। इससे समर्पित ड्रोन कैचर क्षमता की मजबूत जरूरत महसूस हुई।यह कदम भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध में ड्रोन-आधारित खतरों से बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगा। RFI के जवाब में कंपनियां अपनी तकनीक और क्षमताएं साझा करेंगी, जिसके बाद आगे की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।