• February 11, 2026

‘विकल्प’ की तैयारी: निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने राजनीति में आने के दिए संकेत, भाजपा को बताया ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में अपनी बेबाकी के लिए चर्चा में रहने वाले निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अब राजनीतिक मैदान में उतरने के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट रह चुके अग्निहोत्री ने बृहस्पतिवार को शाहजहांपुर में एक तीखी प्रेस वार्ता के दौरान सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर प्रहार किया और प्रदेश की सियासत में एक नए ‘विकल्प’ की तैयारी का ऐलान किया। उन्होंने न केवल भाजपा की कार्यप्रणाली की तुलना ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ से की, बल्कि यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। अग्निहोत्री के इस कदम ने प्रशासनिक गलियारों के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है।

बृहस्पतिवार को शाहजहांपुर पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री ने अपने दौरे की शुरुआत परशुराम धाम में दर्शन-पूजन के साथ की। इसके बाद एक कैफे में मीडियाकर्मियों से रूबरू होते हुए उन्होंने व्यवस्था के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान लोकतांत्रिक ढांचा विफल होता दिखाई दे रहा है और इसी विफलता व घुटन के कारण उन्हें सरकारी सेवा से इस्तीफा देने जैसा कड़ा फैसला लेना पड़ा। अग्निहोत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वर्तमान में देश के हालात बहुत खराब हैं और यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले समय में स्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं।

नए राजनीतिक विकल्प का शंखनाद प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे भविष्य की योजनाओं और राजनीति में प्रवेश को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही नपे-तुले शब्दों में बड़ी घोषणा की। अग्निहोत्री ने कहा, “एक नए विकल्प की तैयारी चल रही है और बहुत जल्द इसकी विधिवत सूचना सार्वजनिक की जाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में सामान्य वर्ग की जो दुर्गति हो रही है, उसमें ओबीसी वर्ग भी समान रूप से प्रताड़ित है। वे इन सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर एक मजबूत राजनीतिक विकल्प देने जा रहे हैं। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीति में एक नए समीकरण के उदय के रूप में देखा जा रहा है, विशेष रूप से सवर्ण और पिछड़ा वर्ग के बीच समन्वय बनाने की उनकी कोशिश को अहम माना जा रहा है।

भाजपा और जनप्रतिनिधियों पर तीखा प्रहार अलंकार अग्निहोत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए उसे आधुनिक ‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी केवल सत्ता के केंद्रीकरण पर ध्यान दे रही है और जनता की वास्तविक समस्याओं से उसका सरोकार कम होता जा रहा है। यूजीसी के नए नियमों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इन नियमों के कारण पूरे देश के युवाओं और शिक्षा जगत में आक्रोश की अग्नि धधक रही है, लेकिन भाजपा के जनप्रतिनिधि इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे नेता, जिनके पास अपना कोई व्यक्तिगत जनाधार नहीं है और जो केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव जीतकर सदन तक पहुंचे हैं, वे जनता की आवाज उठाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।

अग्निहोत्री ने तुलनात्मक रूप से पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह और राजा भैया जैसे नेताओं का नाम लेते हुए कहा कि केवल वही नेता जनता की बात मजबूती से रख पा रहे हैं जिनका अपना व्यक्तिगत आधार है। उन्होंने भाजपा के ब्राह्मण चेहरों को भी आड़े हाथों लिया और उन्हें ‘कुल गौरव’ व ‘शर्म-हया’ का हवाला देते हुए समाज के हितों के लिए आवाज उठाने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय ये नेता केवल हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का सहारा लेकर अपनी वैतरणी पार कर लेते हैं, लेकिन नीतिगत मुद्दों पर मौन रहते हैं।

एससी-एसटी एक्ट और सामाजिक समीकरण अपनी प्रेस वार्ता में अलंकार अग्निहोत्री ने एससी-एसटी एक्ट का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानूनों का दुरुपयोग समाज में खाई पैदा कर रहा है। अग्निहोत्री के साथ इस दौरान कांग्रेस के युवा जिलाध्यक्ष रामजी अवस्थी और जिला महामंत्री गौरव त्रिपाठी समेत कई अन्य स्थानीय नेता भी मौजूद रहे, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उनके नए ‘विकल्प’ को विभिन्न दलों के असंतुष्ट नेताओं का समर्थन मिल सकता है।

शाहजहांपुर की इस प्रेस वार्ता ने यह साफ कर दिया है कि अलंकार अग्निहोत्री अब केवल प्रशासनिक अधिकारी बनकर नहीं रहना चाहते, बल्कि वे व्यवस्था को बदलने के लिए सत्ता के गलियारों में सीधी भागीदारी की तैयारी कर चुके हैं। उनके द्वारा ‘विकल्प’ शब्द का बार-बार इस्तेमाल करना प्रदेश में किसी नई राजनीतिक पार्टी या मोर्चे के गठन की ओर इशारा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में वह अपने इस ‘विकल्प’ का खुलासा किस रूप में करते हैं और उत्तर प्रदेश की जटिल राजनीति में वे कितनी जगह बना पाते हैं।

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