• January 2, 2026

कानपुर के अति प्राचीन राम कुंड तालाब के जीर्णोद्धार की जिलाधिकारी ने शुरू की कवायद

 कानपुर के अति प्राचीन राम कुंड तालाब के जीर्णोद्धार की जिलाधिकारी ने शुरू की कवायद

अति प्राचीन धरोहर राम कुण्ड तालाब के जीर्णोद्धार कराने के लिए कानपुर जिलाधिकारी ने कवायद शुरू की है। तालाब की प्राचीनता को संरक्षित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी के आदेश पर कानपुर मनरेगा विभाग ने कानपुर पुरातत्व विभाग को एक पत्र भेजकर अनुमति मांगा है। कानपुर नगर क्षेत्र के भीतरगांव ब्लाक के बेहटा बुजुर्ग गांव में यह प्राचीन धरोहर है। जिसकी देखरेख एवं संरक्षण की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है। यह जानकारी रविवार को उपायुक्त श्रम रोजगार (मनरेगा) कानपुर पीडीएस रमेश चन्द्र ने दी।

उन्होंने बताया कि कानपुर के भीतरगांव ब्लाक के बेहटा बुजुर्ग गांव में लगभग 4200 वर्ष पुराना मंदिर है। मंदिर के पास ही एक अति प्राचीन तालाब है। जिसका नाम राम कुण्ड तालाब है। जिलाधिकारी कानपुर नगर विशाख जी अय्यर ने तालाब के संरक्षण और मरम्मत कराने के लिए आदेश दिया है। लेकिन जब तक पुरातत्व विभाग इसकी स्वीकृति नहीं देता है तब तक वहां कोई मरम्मत का कार्य करना असंभव है। हालांकि इस संबंध में कानपुर में स्थित पुरातत्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र भेजकर अनुमति के संबंध में बातचीत की जा रही है।

जाने क्या है राम कुंड तालाब की कहानी

राम कुंड तालाब कितना पुराना है, इसको लेकर कई मत है, इतिहासकारों की मानें तो इसे 9वीं शताब्दी का तो कुछ इसे बुद्ध कालीन बताते है। क्योंकि इसकी कलाकृति 9वीं शताब्दी की है। इसे देखने में बौद्ध स्तूप की तरह लगता है, इसलिए अलग-अलग मत है। लेकिन तालाब के पास एक मंदिर है जो लगभग 4200 पुराना है, जबकि जीर्णोद्धार के बाद 1800 वर्ष पुराना बताया जाता है। राम कुंड तालाब को लेकर कहा जाता है कि भगवान राम ने यहां पर लंका विजय के बाद अपने पिता का पिंडदान किया था। एक वक्त था जब लोग इस तालाब में पिंड दान किया करते थे। लेकिन समय के साथ ही साथ मंदिर हो या तालाब फिर गांव सब बदहाल हो चुका है।

राम कुंड तालाब के पास है रहस्यमयी मंदिर, मोटी और हल्की बूंदे करती है मौसम की भविष्यवाणी

दुनिया भर में तमाम रहस्यों के बीच कानपुर के इस मंदिर की चर्चा दुनिया भर में है। मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने वाला ये मंदिर अपने आप में अनोखा है। बारिश कैसी होगी, कब होगी ये मंदिर पहले ही संकेत दे देता है।

प्राचीन धरोहर, पौराणिक कथाएं और न जाने कितने रहस्य ये हिंदुस्तान अपने आंचल में समेटे हुए है। कानपुर के जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर बेहटा बुजुर्ग गांव में ये रहस्यमयी मंदिर न जाने कितने रहस्य छिपे हुए हैो। इसे जगन्नाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यही नहीं जगन्नाथ मंदिर मानसून मंदिर के भी नाम से प्रसिद्ध है।

बेहटा बुजुर्ग गांव में भगवान जगन्नाथ का इकलौता मंदिर है। ऐसा मंदिर पूरे हिंदुस्तान में आप को दूसरा नहीं मिलेगा। क्योंकि इस मंदिर की बनावट की बात हो या इसकी मूर्ति की, दोनों ही अपने आप में अनोखे हैं। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ की मूर्ति है, जिसमें भगवान विष्णु के 24 अवतार साफ देखे जा सकते हैं। इन 24 अवतार में कलयुग में अवतार लेने वाले कल्कि भगवान की भी मूर्ति स्थापित है। जब इस मंदिर परिसर की देखभाल करने वाले पुरातत्व विभाग के कर्मचारी से ये पूछा गया कि आखिर ये मंदिर कितना पुराना है और उसकी मूर्ति कितनी पुरानी है। आखिर इस मंदिर को किसने बनाया? उन्होंने बताया कि इस मंदिर में स्थापित मूर्ति की कार्बन रेटिंग के मुताबिक 42 सौ वर्ष पुरानी बतायी गयी है।

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