• September 2, 2026

मीरा-भाईंदर में SIR के आंकड़ों से सियासी घमासान, 2 विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट पर उठे सवाल; मंत्री सरनाईक ने लगाए गंभीर आरोप

मुंबई: महाराष्ट्र के मीरा-भाईंदर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आंकड़ेवारी सामने आने के बाद मतदाता सूची को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। विधानसभा क्षेत्र 145 मीरा-भाईंदर और 146 ओवला-माजिवड़ा में बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत सामने आने के बाद राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

सरनाईक ने आरोप लगाया कि इन मतदाता रिकॉर्ड का फायदा हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा को मिला। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले उन्होंने फर्जी मतदाताओं को लेकर नगर निगम आयुक्त को जानकारी दी थी, लेकिन उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई।

SIR की आंकड़ेवारी से क्यों बढ़ा विवाद?

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान चलाया गया। इसके तहत राज्य के विधानसभा क्षेत्रों की प्रारूप मतदाता सूचियां 31 अगस्त को जारी की गईं।

मीरा-भाईंदर शहर के दोनों विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता रिकॉर्ड सामने आए हैं, जिनके सत्यापन की आवश्यकता बताई गई है। इन्हीं आंकड़ों को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं।

प्रताप सरनाईक ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आरोप लगाया कि नगर निगम चुनाव के दौरान फर्जी मतदाताओं से संबंधित जानकारी अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

सरनाईक के मुताबिक, इसका फायदा स्थानीय सत्तारूढ़ पार्टी को मिला और चुनाव का परिणाम उसके पक्ष में गया। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भाजपा ने मतदाता सूची के स्तर पर बेहतर तरीके से काम किया, जबकि उनके अपने कार्यकर्ता इस मोर्चे पर पर्याप्त सक्रिय नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि अब पिछली बातों को पीछे छोड़कर आगामी चुनावों की तैयारियों पर ध्यान दिया जा रहा है।

महायुति के भीतर बढ़ सकता है विवाद

मीरा-भाईंदर में मतदाता सूची को लेकर मंत्री प्रताप सरनाईक के आरोप इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भाजपा और शिवसेना महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में शिवसेना के एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा भाजपा पर चुनावी लाभ लेने के आरोप लगाए जाने से स्थानीय स्तर पर गठबंधन के भीतर राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

सरनाईक ने मतदाता सूची में स्थानीय स्तर पर गड़बड़ी होने का आरोप भी लगाया है। इसी बीच शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नाराजगी को लेकर भी राजनीतिक अटकलें चल रही हैं। शिंदे के कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं होने के बाद इन चर्चाओं को और हवा मिली है।

145 और 146 विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े क्या कहते हैं?

SIR की आंकड़ेवारी के मुताबिक, 145 मीरा-भाईंदर विधानसभा क्षेत्र में कुल 5,14,950 मतदाताओं में से 3,01,905 रिकॉर्ड उपलब्ध बताए गए हैं, जबकि 2,13,045 रिकॉर्ड के सत्यापन की आवश्यकता है।

वहीं, 146 ओवला-माजिवड़ा विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,92,537 मतदाताओं में से 1,48,418 रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, जबकि 1,42,661 रिकॉर्ड के सत्यापन की जरूरत बताई गई है।

सरनाईक के अनुसार, सत्यापन की जरूरत वाले रिकॉर्ड में मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे तौर पर ‘फर्जी मतदाता’ मानना उचित नहीं है, क्योंकि सत्यापन की प्रक्रिया के बाद ही किसी रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

अब SIR की आगे की प्रक्रिया और सत्यापन के बाद यह साफ होगा कि इन रिकॉर्ड में कितने मतदाता वास्तव में अपात्र, डुप्लीकेट, मृत या स्थानांतरित हैं। इसी के साथ मीरा-भाईंदर की मतदाता सूची को लेकर चल रहा सियासी विवाद भी आगे बढ़ने की संभावना है।

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