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बहराइच में बड़ा घोटाला: सरकारी फ्री किताबें कबाड़ में बेचने का मामला, 3 कर्मचारी बर्खास्त, 2 सस्पेंड, कई को कारण बताओ नोटिस

बहराइच (उत्तर प्रदेश), 20 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूली बच्चों को मुफ्त में वितरित करने वाली सरकारी पाठ्यपुस्तकों को अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर कबाड़ में बेच दिया। इस भ्रष्टाचार के मामले में अब कार्रवाई तेज हो गई है—3 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, 2 को निलंबित किया गया है और कई अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कैसे सामने आया मामला?
16 फरवरी 2026 की रात करीब 9 बजे जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के सीयूजी नंबर पर सूचना मिली कि ट्रक संख्या UP 21 FT 8485 में शैक्षणिक सत्र 2026-2027 के लिए नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें भारी मात्रा में लादकर काशीपुर (उत्तराखंड) कबाड़ में बेचने के लिए ले जाई जा रही हैं। सूचना रामगांव इलाके के एक कबाड़ी की दुकान के पास से आई थी।
डीएम ने तुरंत गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए। सीडीओ के आदेश पर पुलिस की मदद से ट्रक को लखीमपुर से वापस लाकर रामगांव थाने में जब्त कर लिया गया। जांच में पता चला कि कुल 13,595 किताबें गायब हैं।
कार्रवाई का ब्यौरा
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की जांच कमेटी ने कई कर्मचारियों को दोषी पाया। कार्रवाई के तहत:

  • बर्खास्त किए गए:
    • अनुदेशक अतुल कुमार सिंह
    • जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता आशुतोष सिंह
    • स्पेशल एजुकेटर दीपक कुमार
  • निलंबित किए गए:
    • अनुचर शफीक अहमद
    • अनुचर आलोक कुमार
  • कारण बताओ नोटिस जारी:
    • प्रभारी सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश कुमार वर्मा
    • खण्ड शिक्षा अधिकारी डाली मिश्रा
    • खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय, बहराइच रंजीत कुमार

बीएसए की लापरवाही की भी विभागीय जांच चल रही है। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करा दिया है।

डीएम का बयान
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने कहा, “सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई। ट्रक जब्त कर लिया गया है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
यह मामला उत्तर प्रदेश में शिक्षा विभाग के भीतर भ्रष्टाचार और लापरवाही का गंभीर उदाहरण बन गया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने इसे बच्चों के साथ अन्याय करार देते हुए जांच की मांग की है।

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