• February 14, 2026

2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार) को: विशेष संयोग, मनोकामना पूर्ति का योग; देशभर में शिवालयों में जोरदार तैयारी, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026: इस साल महाशिवरात्रि पूरे देश में भक्ति और उत्साह की लहर लेकर आ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि पर पड़ने वाला यह महापर्व 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाया जाएगा। यह दिन कई वर्षों बाद रविवार को आ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग मनोकामनाओं की पूर्ति, आध्यात्मिक उन्नति और विशेष फलदायी माना जा रहा है।विशेष महत्व और पौराणिक संयोग
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक है। इस दिन शिव ने निराकार से साकार रूप धारण किया और पार्वती से विवाह किया। साथ ही, यह शिव की तांडव नृत्य और ब्रह्मांड की रचना-संहार की रात्रि भी है। इस वर्ष रविवार का संयोग, चंद्रमा-शनि-गुरु की विशेष स्थिति और चार पहर की पूजा इसे अत्यंत शुभ बनाती है। कई ज्योतिषियों के अनुसार, यह दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अन्य शुभ योगों के साथ आ रहा है, जो भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने में सहायक होगा।
शिवालयों में धूमधाम से तैयारी
देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ (वाराणसी), सोमनाथ (गुजरात), महाकालेश्वर (उज्जैन), बैद्यनाथ (देवघर), त्र्यंबकेश्वर (नासिक), रामेश्वरम और अमरनाथ में भक्तों के दर्शन के लिए तैयारियां आज से ही शुरू हो गई हैं। मंदिरों में साफ-सफाई, सजावट, भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना की व्यवस्था की जा रही है। लाखों श्रद्धालु रात भर जागरण, बेलपत्र चढ़ाने, रुद्राभिषेक और शिव चालीसा पाठ करने पहुंचेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पुलिस, होमगार्ड और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी और बैरिकेडिंग के साथ ही मंदिर परिसरों में चेकिंग और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कई राज्यों में ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है।
पूजा मुहूर्त और व्रत नियम

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी शाम 5:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
  • निशिता काल पूजा (सबसे शुभ): रात 12:09 बजे से 1:11 बजे तक (विभिन्न शहरों में थोड़ा अंतर)
  • व्रत पारण: 16 फरवरी सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक

भक्त निर्जला या फलाहारी व्रत रखेंगे, रात भर जागरण करेंगे और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जपेंगे।

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