• February 3, 2026

सोना-चांदी में ऐतिहासिक गिरावट: जनवरी अंत में रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद 30 जनवरी को भारी बिकवाली, बजट डे पर भी दबाव जारी

नई दिल्ली : जनवरी 2026 के आखिरी सप्ताह तक सोना और चांदी में जबरदस्त तेजी देखी गई थी, जहां दोनों कीमती धातुएं एमसीएक्स (Multi Commodity Exchange) पर अपने अब तक के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। लेकिन 30 जनवरी को यह उछाल अचानक थम गया और बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में एक ही सत्र में लगभग 27-30% की भारी गिरावट आई, जो दशकों में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट मानी जा रही है (कुछ रिपोर्ट्स में COMEX पर 37% तक का उल्लेख)। सोने में भी पिछले दस वर्षों या उससे अधिक समय की सबसे तेज एकदिनी गिरावट देखी गई। रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कीमतें अचानक टूट गईं, जिससे चांदी करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो और सोना लगभग 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।
गिरावट के प्रमुख कारण:

    • जबरदस्त उछाल के बाद निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली और बिकवाली।
    • अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से कीमती धातुओं की मांग कमजोर पड़ी।
    • विदेशी एक्सचेंजों (जैसे CME) द्वारा ट्रेडिंग मार्जिन बढ़ाए जाने से ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी, जिससे अतिरिक्त दबाव बना।
    • ओवरबॉट स्थिति और लिक्विडिटी इश्यूज ने भी गिरावट को तेज किया।
      घरेलू बाजार में इस भारी बिकवाली के बाद कारोबारी और निवेशक इन धातुओं की आगे की चाल पर गहरी नजर रखे हुए हैं।
      चांदी में 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट ने बाजार में हलचल मचा दी है।
      बजट 2026 का असर: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा यूनियन बजट 2026-27 पेश करने के मद्देनजर एमसीएक्स पर विशेष रविवार सत्र में कारोबार हुआ। इस दौरान सोना और चांदी की फ्यूचर्स में और गिरावट देखी गई—सोना 6-9% तक नीचे आया (कुछ समय में ₹1.36-1.47 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास), जबकि चांदी 9% लोअर सर्किट पर लॉक हो गई (₹2.65-2.68 लाख प्रति किलो के स्तर पर)। हालांकि कुछ समय बाद सोने में मामूली रिकवरी भी दिखी।निवेशक अब बजट में किसी राहत या नीतिगत बदलाव (जैसे इंपोर्ट ड्यूटी या अन्य फैक्टर्स) पर नजरें टिकाए हुए हैं, क्योंकि सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना-चांदी पर दबाव बना रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार (correction) ओवरहीटेड रैली के बाद सामान्य है, लेकिन आगे की दिशा बजट और ग्लोबल संकेतों पर निर्भर करेगी।
Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *