स्कूल खुलने से पहले बच्चों की स्लीप रूटीन सुधारें, सुबह जल्दी उठना होगा आसान
गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों की दिनचर्या अक्सर पूरी तरह बदल जाती है। देर रात तक मोबाइल चलाना, टीवी देखना, खेलना और सुबह देर तक सोना उनकी आदत बन जाती है। लेकिन जब स्कूल दोबारा खुलते हैं, तो यही बदली हुई दिनचर्या बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए चुनौती बन जाती है। ऐसे में यदि स्कूल शुरू होने से पहले ही बच्चों की सोने और उठने की आदत को धीरे-धीरे सामान्य कर लिया जाए, तो नई दिनचर्या अपनाना काफी आसान हो सकता है।
सबसे पहले सुधारें सोने और उठने का समय
अगर बच्चा छुट्टियों में रात 11 या 12 बजे सोने का आदी हो गया है, तो स्कूल खुलने से एक-दो दिन पहले अचानक रात 9 बजे सुलाना आसान नहीं होगा। इसलिए स्कूल शुरू होने से कम से कम एक सप्ताह पहले हर दिन 15 से 20 मिनट पहले सुलाने और उसी अनुसार सुबह जल्दी उठाने की कोशिश करें। इससे शरीर नई दिनचर्या के अनुसार खुद को धीरे-धीरे ढाल लेता है।
डिनर और दोपहर की नींद पर भी दें ध्यान
सिर्फ सोने का समय बदलना ही पर्याप्त नहीं है। बच्चों का रात का खाना भी समय पर होना चाहिए। देर से डिनर करने पर पाचन प्रभावित होता है और अच्छी नींद आने में भी परेशानी हो सकती है। बेहतर होगा कि सोने से करीब दो घंटे पहले हल्का और पौष्टिक भोजन कराया जाए।
अगर छुट्टियों के दौरान बच्चे दोपहर में लंबे समय तक सोने के आदी हो गए हैं, तो इस आदत को भी धीरे-धीरे कम करें। पहले डे-नैप का समय घटाएं और फिर जरूरत के अनुसार इसे बंद करें। इससे रात में जल्दी नींद आएगी और सुबह उठना आसान होगा।
सोने से पहले स्क्रीन टाइम करें कम
मोबाइल, टैबलेट, टीवी और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल सोने से ठीक पहले करने से बच्चों की नींद प्रभावित हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद कर दी जाएं। इस समय में बच्चों को कहानी सुनाना, किताब पढ़ने के लिए प्रेरित करना या परिवार के साथ हल्की बातचीत करना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे उन्हें मानसिक रूप से आराम मिलता है और जल्दी नींद आने में मदद मिलती है।
सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डालें?
अगर बच्चा सुबह उठने में आनाकानी करता है, तो उसे डांटने के बजाय कुछ आसान और व्यावहारिक तरीके अपनाएं। सुबह उठते ही कमरे के पर्दे खोल दें ताकि प्राकृतिक रोशनी अंदर आए। बच्चे को तुरंत नहलाने या तैयार करने की बजाय कुछ देर कमरे में टहलने या हल्की गतिविधि करने दें। इससे शरीर सक्रिय होता है और वह जल्दी अपनी सुबह की दिनचर्या शुरू कर पाता है।
शुरुआत में रखें धैर्य
छुट्टियों के बाद नई दिनचर्या अपनाने में बच्चों को थोड़ा समय लगना सामान्य बात है। ऐसे में अगर शुरुआती दिनों में उन्हें सुबह उठने में परेशानी हो, तो गुस्सा करने की बजाय धैर्य रखें और उनका सहयोग करें। जब सोने और उठने का समय नियमित हो जाएगा, तो स्कूल की सुबह भी पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और व्यवस्थित लगेगी।