• February 11, 2026

10 फरवरी: आजाद भारत के पहले लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने की तारीख, कांग्रेस ने जीती 364 सीटें

नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां हर पांच साल में लोकसभा चुनाव होते हैं और जनता अप्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री चुनती है। राज्य विधानसभाओं और पंचायत स्तर पर भी नियमित चुनाव आयोजित होते हैं। लेकिन 10 फरवरी की तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में खास है—आज ही 1952 में आजाद भारत के पहले लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने शुरू हुए थे।
पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस ऐतिहासिक चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल किया था। आइए जानते हैं उस पहले आम चुनाव की पूरी कहानी।कब और कैसे हुए थे पहले लोकसभा चुनाव?
स्वतंत्रता के बाद 1949 में चुनाव आयोग का गठन हुआ। 1950 में सुकुमार सेन देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बने। उसी साल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम पारित हुआ, जिसमें चुनाव कराने के नियम तय किए गए।
पहले आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक चले। ज्यादातर हिस्सों में वोटिंग 1952 में हुई, लेकिन बर्फबारी के कारण हिमाचल प्रदेश में 1951 में ही मतदान करा लिया गया। जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं हुए। कुल 68 चरणों में यह चुनाव संपन्न हुआ—यह दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग था।
1952 में कितने वोटर थे?
1951 की पहली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी 36.1 करोड़ थी। इसमें से 17.32 करोड़ (173,212,343) मतदाता पंजीकृत थे। 21 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिक वोट देने के हकदार थे।
चुनाव की तैयारियों में 16,500 क्लर्कों को 6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया था। वोटर लिस्ट तैयार करने और मतदान के लिए कुल 1,96,084 मतदान केंद्र बनाए गए। मतदान प्रतिशत करीब 44.87% से 45.7% रहा।
चुनाव परिणाम क्या रहे?
पहली लोकसभा के लिए कुल 489 सीटें थीं। इन पर 1,949 उम्मीदवारों ने दावा ठोका। 10 फरवरी 1952 को परिणाम आने शुरू हुए—कांग्रेस ने शुरुआत में ही बहुमत हासिल कर लिया।
अंतिम परिणामों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 45% वोट शेयर के साथ 364 सीटें जीतीं। यह एक भारी बहुमत था। मुख्य विपक्षी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) को 3.29% वोट और 16 सीटें मिलीं। सोशलिस्ट पार्टी को 10.59% वोट और 12 सीटें, जबकि किसान मजदूर प्रजा पार्टी (KMPP) को 5.79% वोट और 9 सीटें मिलीं। बाकी सीटें निर्दलीय और अन्य छोटे दलों को गईं। कांग्रेस की इस जीत के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह चुनाव न केवल भारत की लोकतांत्रिक यात्रा की शुरुआत था, बल्कि दुनिया को दिखाया कि एक नए स्वतंत्र राष्ट्र में भी जनता की आवाज सर्वोपरि है। आज भी 10 फरवरी हमें उस गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है।
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