• February 11, 2026

धराली गांव फिर से नहीं बसेगा, सरकार ने लिया शिफ्टिंग का फैसला

लखनऊ/ 14 अगस्त: 10 साल में 3 आपदाओं ने मचाई तबाही, 43 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन भी जारी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को बादल फटने से आई भीषण आपदा ने पूरे गांव को तहस-नहस कर दिया। इस तबाही के बाद सरकार ने फैसला लिया है कि धराली गांव को अब उसकी मौजूदा जगह पर दोबारा नहीं बसाया जाएगा। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ कि गांव को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। पिछले 10 साल में धराली में तीन बड़ी आपदाओं ने भारी नुकसान पहुंचाया, जिसमें इस बार 43 लोग लापता हैं और केवल एक शव बरामद हुआ है।

34 सेकंड में बर्बाद हुआ धराली, मलबे में दबा गांव

5 अगस्त 2025 को दोपहर 1:45 बजे खीर गंगा नदी में बादल फटने से आए सैलाब ने महज 34 सेकंड में धराली गांव को मलबे और बाढ़ में डुबो दिया। 20 से 60 फीट ऊंचा मलबा 80 एकड़ क्षेत्र में फैल गया, जिसमें घर, होटल, दुकानें, और 1500 साल पुराना कल्प केदार महादेव मंदिर भी दब गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहाड़ों से बम फटने जैसी आवाज के बाद मलबे और पानी की छह लहरें एक के बाद एक आईं, जिसने गांव को दलदल और रेत में दफन कर दिया। अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 43 लोग लापता हैं, जिनमें पर्यटक, स्थानीय लोग और सेना के 8-10 जवान शामिल हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौतियां

आपदा के बाद सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, और आईटीबीपी की टीमें दिन-रात बचाव कार्य में जुटी हैं। अब तक 931 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन 250 लोग अभी भी फंसे हैं। धराली तक सड़क मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से हाईटेक मशीनें और उपकरण नहीं पहुंच पा रहे। भटवाड़ी से हर्षिल तक तीन बड़े भूस्खलन और गंगनानी के पास 30 मीटर लंबा पुल टूटने से राहत कार्य बाधित हैं। चिनूक और एमआई हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है, लेकिन खराब मौसम और ग्लेशियर ब्लास्ट की आशंका चुनौतियां बढ़ा रही है।

क्यों शिफ्ट होगा गांव?

धराली गांव ट्रांस हिमालय क्षेत्र में मेन सेंट्रल थ्रस्ट पर बसा है, जो भूकंप और भूस्खलन के लिए अत्यंत संवेदनशील है। वैज्ञानिकों के अनुसार, 1864, 2013, और 2014 में भी धराली में बादल फटने की घटनाएं हुई थीं, लेकिन सरकार ने गांव को शिफ्ट करने की सिफारिशों पर अमल नहीं किया। वरिष्ठ ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉ. डीपी डोभाल का कहना है कि इस बार की आपदा बादल फटने से नहीं, बल्कि ग्लेशियर ब्लॉक और एवलांच के कारण हुई हो सकती है, क्योंकि आईएमडी ने 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज नहीं की। सरकार ने अब नदियों के किनारे और लैंडस्लाइड जोन में नए निर्माण पर रोक लगा दी है।

सरकारी सहायता और पुनर्वास योजना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ितों के लिए 5 लाख रुपये की सहायता राशि की घोषणा की। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के मालिकों को भी 5 लाख रुपये दिए जाएंगे। पुनर्वास और आजीविका सुधार के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है, जो एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। हर्षिल में बेस कैंप बनाकर राहत कार्यों को तेज किया जा रहा है, और वी-सेट से मोबाइल नेटवर्क बहाल किया गया है।

धराली का महत्व और नुकसान

धराली गांव गंगोत्री धाम से 18 किमी पहले प्रमुख पड़ाव है, जहां पर्यटक और तीर्थयात्री रुकते थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां 137 परिवार रहते थे। इस आपदा में पर्यटकों, मजदूरों और स्थानीय लोगों के साथ-साथ सेना का कैंप और हेलीपैड भी बह गया। हर्षिल के सेब बागान प्रभावित हुए, जिससे किसानों की आजीविका पर संकट गहरा गया है।

मंदिर में पूजा के कारण सुरक्षित रहे गांव के बुजुर्ग

हैरानी की बात है कि आपदा के समय धराली के अधिकांश बुजुर्ग 300 मीटर दूर पूर्वजों के मंदिर में सामूहिक पूजा के लिए गए थे, जिस कारण वे सुरक्षित रहे। हालांकि, युवा, कारोबारी और पर्यटक इस त्रासदी की चपेट में आए।

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