• February 3, 2026

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यूपी में बुलडोजर कार्रवाई जारी: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, की तीखी टिप्पणी

प्रयागराज, 3 फरवरी 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद बुलडोजर एक्शन जारी रहने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बाद भी राज्य में दंडात्मक तोड़-फोड़ का सिलसिला थम नहीं रहा है। हाई कोर्ट ने इसे शक्तियों के बंटवारे का उल्लंघन बताते हुए तल्ख टिप्पणी की।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डबल बेंच ने हमीरपुर जिले से जुड़े एक मामले में सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं। याचिकाकर्ता फैमुद्दीन और उनके माता-पिता ने अपनी संपत्तियों – घर, लॉज और आरा मिल – को संभावित बुलडोजर कार्रवाई से बचाने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने क्या कहा?

  • अदालत ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इमारतों को सजा के तौर पर तोड़ना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि प्रशासन का। यह शक्तियों के बंटवारे का उल्लंघन है।”
  • कोर्ट ने आगे कहा, “हम ऐसे कई मामलों के गवाह हैं जहां अपराध होने के तुरंत बाद रहने की जगह पर कब्जा करने वाले लोगों को नोटिस जारी कर दिया जाता है। फिर कानूनी औपचारिकताओं का दिखावा करके संपत्ति को ध्वस्त कर दिया जाता है।”

मामले की पृष्ठभूमि याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जनवरी में उनके एक रिश्तेदार पर रेप, POCSO एक्ट और यूपी गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था। याचिकाकर्ता खुद FIR में सह-आरोपी नहीं थे, लेकिन घटना के तुरंत बाद पुलिस की मिलीभगत से भीड़ ने उनके घर पर हमला किया। इसके बाद जिला प्रशासन ने नोटिस जारी कर संपत्ति तोड़ने की तैयारी शुरू कर दी।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया कि बिना उचित प्रक्रिया और सुनवाई के संपत्ति को नष्ट करना गैरकानूनी है। उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की ताकि उनकी संपत्तियों को बचाया जा सके।सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही कई मामलों में स्पष्ट किया है कि बुलडोजर एक्शन को सजा के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह कार्यकारी शाखा का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी कार्रवाई केवल तभी वैध है जब वह पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए हो।हाई कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की है और याचिकाकर्ताओं की संपत्तियों पर कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से यूपी में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
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