ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में ‘देसी सुपरफूड उत्सव’: मिलेट्स से बने व्यंजनों ने मचाई धूम, छात्रों ने दिखाई रचनात्मकता
लखनऊ: ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के गृह विज्ञान विभाग ने 17 फरवरी 2026 को “देसी सुपरफूड उत्सव” का भव्य आयोजन किया। इस वर्ष उत्सव की थीम “मिलेट के रंग, स्वास्थ्य के संग” रही, जिसमें मिलेट्स (श्री अन्न) के पोषण मूल्य और महत्व को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कुलपति के संरक्षण और गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. तत्हीर फात्मा के निर्देशन में आयोजित इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को मोटे अनाजों (बाजरा, ज्वार, रागी आदि) के स्वास्थ्य लाभों से अवगत कराना तथा उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना था।
विभागाध्यक्ष का संदेशअपने संबोधन में डॉ. तत्हीर फात्मा ने कहा, “मिलेट्स न केवल पौष्टिक और ग्लूटेन-मुक्त होते हैं, बल्कि इनमें फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं। आज के व्यस्त जीवन में इन्हें दैनिक आहार में शामिल करना बहुत जरूरी है।”

मिलेट प्रतियोगिता और व्यंजन प्रदर्शनी
उत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में “मिलेट प्रतियोगिता” आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मिलेट्स से बने नवाचारी, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन तैयार किए। प्रतियोगिता में व्यंजनों की प्रस्तुति, स्वाद, पोषण मूल्य और रचनात्मकता के आधार पर मूल्यांकन किया गया।
कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई मिलेट व्यंजनों की आकर्षक प्रदर्शनी ने सभी का ध्यान खींचा। छात्रों ने बाजरा, ज्वार और रागी से बने लड्डू, हलवा, इडली, डोसा, उपमा, खिचड़ी, रोटी, पराठा, स्मूदी और कई अन्य व्यंजन बनाकर प्रदर्शित किए।
सफल आयोजन में सहयोग
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कल्पना देवी, डॉ. कीर्तिमा सचान और डॉ. अंजलि सिंह के मार्गदर्शन में हुआ। निर्णायक मंडल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन किया और उन्हें प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस उत्सव ने न केवल मिलेट्स के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि छात्रों में स्वस्थ खान-पान और रचनात्मकता को भी प्रोत्साहित किया।ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ ने एक बार फिर साबित किया कि शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता को जोड़ना कितना महत्वपूर्ण है।