ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत् वाले दर्शन पर चल रही उप्र
राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय सचिव अनुपम मिश्रा ने रविवार को कहा कि ‘यावेत जीवेत सुखम जीवेत, ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत्’ अर्थात जब तक जियो सुख से जियो, ऋण लेकर भी घी पियो। महर्षि चर्वाक ने इस श्लोक में भौतिकवाद की जो शिक्षा दी अपने समय में यह श्लोक भले ही लोगों को अधिक प्रभावित नहीं कर पाया हो, लेकिन वर्तमान समय में प्रदेश की स्थिति कुछ इसी तरह की है। राज्यों के वित्तीय घाटे […]Read More






