• January 31, 2026

बजट 2026 में सैलरीड क्लास को मिल सकती है बड़ी राहत: नए टैक्स रेजिम को और आकर्षक बनाने की उम्मीद, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ सकता है ₹1 लाख तक

नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले यूनियन बजट 2026 में सैलरी पाने वाले वर्ग (सैलरीड क्लास) की नजरें टैक्स राहत पर टिकी हैं। जानकारों और टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार पुराने व्यक्तिगत आयकर रेजिम को अचानक या पूरी तरह खत्म नहीं करेगी, बल्कि नए टैक्स रेजिम को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए मजबूत कदम उठा सकती है।

नए रेजिम को प्रोत्साहन देने की रणनीति
सरकार का रुख स्पष्ट है- पुराने रेजिम को जबरदस्ती खत्म करने के बजाय, नए रेजिम में अतिरिक्त प्रोत्साहन देकर करदाताओं को स्वेच्छा से उसकी ओर आकर्षित करना। यह धीमी लेकिन स्पष्ट नीतिगत बदलाव की दिशा में कदम है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एक्सपर्ट्स के अनुसार, बजट में संभावित बदलावों में शामिल हो सकते हैं:

स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी: नए रेजिम में मौजूदा ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख तक किया जा सकता है, ताकि महंगाई के प्रभाव को कम किया जा सके और टेक-होम सैलरी बढ़े।

विवाहित जोड़ों के लिए वैकल्पिक जॉइंट फाइलिंग: संयुक्त टैक्स फाइलिंग का विकल्प, जो परिवारों को ज्यादा राहत दे सकता है।

सीमित कटौतियां बहाल करना: कुछ आवश्यक खर्चों जैसे मेडिकल (सेक्शन 80D), विकलांगता देखभाल या अन्य चुनिंदा मदों के लिए सीमित डिडक्शन नए रेजिम में शामिल हो सकते हैं।

मौजूदा स्थिति और अंतर
बजट 2025 में नए रेजिम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया था, जिससे सैलरीड क्लास के लिए प्रभावी टैक्स-फ्री इनकम ₹12.75 लाख तक पहुंच गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे कोई भी अतिरिक्त बढ़ोतरी सिर्फ नए रेजिम में ही लागू होगी, जिससे पुराने और नए रेजिम के बीच का गैप और बढ़ेगा। बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि सैलरीभोगी परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सरकारी आंकड़े रणनीति की सफलता दिखाते हैं
वित्त वर्ष 2023-24 में 72% करदाता (लगभग 5.27 करोड़) ने नए टैक्स रेजिम को चुना। अनुमान है कि आयकर वर्ष 2025-26 में यह संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि स्लैब रेशनलाइजेशन, रिबेट्स और अन्य लाभ मिडिल क्लास के लिए फायदेमंद साबित हो रहे हैं। हालांकि, करीब 28% करदाता (लगभग 2 करोड़) अभी पुराने रेजिम में बने हुए हैं, मुख्य रूप से HRA, हेल्थ इंश्योरेंस (80D), होम लोन ब्याज, एजुकेशन लोन जैसी कटौतियों के कारण।

कुल मिलाकर फोकस सरल और आकर्षक टैक्स सिस्टम पर
बजट 2026 में बड़े उलट-पलट की बजाय नए रेजिम को मजबूत करने पर जोर रहने की संभावना है। यह बदलाव सैलरीड क्लास को ज्यादा राहत देने, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और करदाताओं को स्वेच्छा से नए रेजिम की ओर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करेंगी, जहां इन उम्मीदों पर नजर रहेगी।

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