Border 2 Movie Review: इमोशंस और स्टार पावर से सजी ‘बॉर्डर 2’, जोश है, जज़्बा है… लेकिन क्या वही जादू दोहराती है?
फिल्म: बॉर्डर 2
कलाकार: सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ, अहान शेट्टी, मोना सिंह, मेधा राणा, सोनम बाजवा, अन्या सिंह
निर्देशक: अनुराग सिंह
लेखक: अनुराग सिंह, निखिल नटराजन
निर्माता: भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जे.पी. दत्ता, निधि दत्ता
बैनर: टी-सीरीज फिल्म्स, जे.पी. फिल्म्स
रिलीज डेट: 23 जनवरी 2026
करीब तीन दशक पहले आई जे.पी. दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार वॉर फिल्मों में शामिल हो गई थी। देशभक्ति, जज़्बात, संगीत और दमदार संवादों ने उसे क्लासिक बना दिया। ऐसे में ‘बॉर्डर 2’ से उम्मीदें आसमान पर थीं। अब जब यह फिल्म 23 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, तो सवाल यही है—क्या यह फिल्म पहले भाग की विरासत को आगे बढ़ा पाती है?
बड़े स्केल की, इमोशंस से भरी वॉर फिल्म
‘बॉर्डर 2’ एक भव्य और इमोशनल वॉर ड्रामा है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी है। यह फिल्म सिर्फ सीमा पर लड़ी गई लड़ाई की कहानी नहीं कहती, बल्कि उन जवानों और उनके परिवारों की भावनाओं को भी सामने लाने की कोशिश करती है, जिनके लिए देश सबसे पहले आता है।
फिल्म बड़े पर्दे पर देखने में शानदार लगती है। युद्ध के सीन, देशभक्ति से भरे संवाद और बैकग्राउंड में गूंजता म्यूजिक दर्शकों को बांधे रखता है। खास बात यह है कि फिल्म के शुरुआती क्रेडिट्स में जब सनी देओल के नाम के साथ लिखा आता है—“धर्मेंद्र जी का बेटा”, तो एक भावनात्मक सन्नाटा सा छा जाता है। नवंबर 2025 में धर्मेंद्र के निधन के बाद यह सनी देओल की पहली फिल्म है और यह भाव फिल्म को और गहराई दे देता है।
कहानी: तीन मोर्चे, एक जंग
फिल्म की कहानी 1971 के युद्ध के दौर में सेट है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच जंग ज़मीन, आसमान और समंदर—तीनों मोर्चों पर लड़ी जा रही थी।
कहानी के केंद्र में तीन दोस्त हैं—
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होशियार सिंह (वरुण धवन) – भारतीय सेना का जवान
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निर्मलजीत सिंह (दिलजीत दोसांझ) – भारतीय वायुसेना का फाइटर पायलट
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महेंद्र रावत (अहान शेट्टी) – भारतीय नौसेना का कमांडर
तीनों ने एक ही अकादमी से ट्रेनिंग ली है और देशसेवा का सपना साझा करते हैं। इनके मेंटर हैं फतेह सिंह (सनी देओल), जो इस वक्त बॉर्डर पर अपनी बटालियन की कमान संभाल रहे हैं।
फिल्म की शुरुआत जवानों और उनके परिवारों की शांत, सामान्य जिंदगी से होती है। लेकिन जैसे-जैसे सीमा पर तनाव बढ़ता है, माहौल गंभीर होता जाता है। अचानक दुश्मन के हमलों के बाद असली परीक्षा शुरू होती है।
जब पाकिस्तान भारत पर तीनों दिशाओं से हमला करता है, तब हालात बेहद मुश्किल हो जाते हैं। ऐसे में चारों किरदार अपने-अपने मोर्चों पर डटकर देश की रक्षा में जुट जाते हैं। कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है और दर्शक अंत तक यही जानना चाहता है कि क्या ये सभी मिलकर भारत को बचा पाएंगे—और किस कीमत पर?
अभिनय: फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
‘बॉर्डर 2’ की सबसे मजबूत कड़ी इसका अभिनय है।
सनी देओल जैसे ही स्क्रीन पर आते हैं, थिएटर में सीटियां और तालियां गूंजने लगती हैं। उनका गुस्सा, उनकी आंखों में देश के लिए आग और संवाद अदायगी—सब कुछ प्रभावशाली है। उम्र के बावजूद सनी देओल अपने किरदार में पूरी जान डाल देते हैं और दर्शक उनसे तुरंत जुड़ जाते हैं।
वरुण धवन को ट्रेलर के वक्त एक्सप्रेशन्स को लेकर काफी ट्रोल किया गया था, लेकिन फिल्म में उन्होंने खुद को साबित किया है। उनका अभिनय सच्चा और भावनात्मक लगता है। खासकर युद्ध के दौरान उनके डर, गुस्से और कर्तव्यबोध के सीन असर छोड़ते हैं।
दिलजीत दोसांझ फाइटर जेट उड़ाते हुए बेहद स्टाइलिश नजर आते हैं। उनके हवाई युद्ध वाले सीन फिल्म के हाई पॉइंट्स में शामिल हैं। दिलजीत अपनी सहजता और स्क्रीन प्रेजेंस से किरदार को मजबूती देते हैं।
अहान शेट्टी भी अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। कुछ सीन में उनके अभिनय में उनके पिता सुनील शेट्टी के आइकॉनिक अंदाज़ की झलक साफ दिखती है, जो फैंस को पसंद आएगी।
फीमेल कलाकार—मोना सिंह, मेधा राणा, सोनम बाजवा और अन्या सिंह—स्क्रीन पर ज्यादा समय के लिए नहीं हैं, लेकिन हर सीन में भावनात्मक असर छोड़ती हैं। उनका रोल कहानी को संवेदनशील बनाता है। सपोर्टिंग कास्ट ने भी ईमानदारी से अपना काम किया है।
निर्देशन: नीयत अच्छी, पकड़ थोड़ी कमजोर
निर्देशक अनुराग सिंह ने फिल्म को बड़े पैमाने पर बनाने की पूरी कोशिश की है। देशभक्ति और इमोशंस को उन्होंने खुलकर इस्तेमाल किया है, लेकिन निर्देशन उस स्तर का मजबूत नहीं लगता, जितनी उम्मीद एक बड़ी वॉर फिल्म से की जाती है।
कई सीन बेहद प्रभावी हैं, लेकिन पूरी फिल्म में निर्देशन की क्वालिटी एक-सी नहीं रहती। कहीं-कहीं कहानी को और गहराई से पेश किया जा सकता था। फिल्म ज्यादा तर अपनी इमोशंस और स्टार पावर के सहारे आगे बढ़ती है, जबकि स्क्रीनप्ले और प्रेजेंटेशन में और कसावट की जरूरत महसूस होती है।
म्यूजिक: दिल को छूने वाला
फिल्म का म्यूजिक इसकी आत्मा है। गाने कहानी के साथ बहते हैं और भावनाओं को और मजबूत बनाते हैं।
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‘घर कब आओगे’ सीधे दिल को छू जाता है
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‘मिट्टी के बेटे’ सुनकर आंखें नम हो जाती हैं
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‘जाते हुए लम्हों’ छोटा है, लेकिन सीन पर इसका असर गहरा है
बैकग्राउंड म्यूजिक खासतौर पर तारीफ के काबिल है। जैसे ही “हिंदुस्तान मेरी जान…” बजता है, पूरे थिएटर में जोश भर जाता है।
निगेटिव पॉइंट्स: तकनीकी कमियां
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी टेक्निकल क्वालिटी है। ट्रेलर के वक्त वीएफएक्स को लेकर जो शिकायतें थीं, उनमें से कुछ फिल्म में भी नजर आती हैं। कुछ जगह विजुअल्स उतने शार्प नहीं लगते और युद्ध के सीन तकनीकी तौर पर और बेहतर हो सकते थे।
इसके अलावा फिल्म कोई बहुत नया या इनोवेटिव प्रयोग नहीं करती। कहानी और ट्रीटमेंट कई बार परिचित लगते हैं।
देखें या नहीं?
अगर आप ऐसी वॉर फिल्म ढूंढ रहे हैं, जिसमें हर सीन तकनीकी रूप से परफेक्ट हो, स्क्रीनप्ले बेहद टाइट हो और कहानी में बारीकियां हों, तो ‘बॉर्डर 2’ आपको पूरी तरह संतुष्ट नहीं करेगी।
लेकिन अगर आप इमोशंस, देशभक्ति, सनी देओल का जोश, स्टार्स के दमदार पल और बड़े पैमाने पर फिल्माए गए युद्ध सीन देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी।
नीयत साफ है, जज़्बा सच्चा है—बस हर जगह उसका एक्जीक्यूशन उतना शानदार नहीं है।