छतरपुर : इन दिनों बाबा बागेश्वर की जमकर चर्चा हो रही है। उनकी शक्तियों और चमत्कार पर सवाल खड़े किये गए है। ऐसे में वे आरोपों से भले ही बरी हो गए है , लेकिन अब जो घटना समाने आयी है वह बाबा धीरेन्द्र शास्त्री की शक्तियों पर उठाए गए सवालों को हकीकत में बदलती नजर आ रही है। दरअसल, राजस्थान के बाडमेर से अपने परिजनों के साथ उपचार के लिए बाबा धीरेन्द्र शास्त्री के दरबार में पहुंची। जहां बाबा ने उचार के तौर पर बच्ची को भभूति भी दी लेकिन बच्ची की जान नहीं बच पाई।
मिर्गी के दौरे के बाद बच्ची की मौत
बच्ची के परिवारवालों ने इस घटना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि, ”18 फरवरी, शनिवार की रात को बच्ची जागती रही थी। उसे कई बार मिर्गी के दौरे भी आए थे। 19 फरवरी को उसने आंखें बंद की तो हमें लगा कि उसे नींद आ गई, लेकिन ऐसा नहीं था, उसकी जान जा चुकी थी। हमें उसे जिला अस्पताल लेकर आए, यहां आने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”
बाबा की शरण में भी बच्ची को नहीं मिला उपचार
मृतक बच्ची की मामी ने बताया की, हम तकरीबन डेढ़ सालों ने बच्ची के उपचार के लिए बागेश्वर धाम आ रहे है। लेकिन इन दिनों बच्ची की समस्या ज्यादा बढ़ गयी तो उसे उपचार के लिए फिर से बाबा के पास लेकर आए। उन्होंने बच्ची को उपचार के तौर पर भभूति दी। लेकिन उसके बाद भी बच्ची कि तबियत में कोई बदलाव नहीं हुआ। लगातार उसकी तबियत बिगड़ती रही ”
सामने आई सरकारी महकमें की लापरवाही
इस घटना में बागेश्वर धाम सहित जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम बखूबी नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि, बच्ची की मौत के बाद परिजनों को शव ले जाने के लिए जिला अस्पताल से एंबुलेंस और स्ट्रेचर तक नहीं मिला। सरकारी एंबुलेंस भी नदारद थी। बच्ची के परिजन उसके शव को गोद में उठाकर निजी एंबुलेंस तक ले गए। उन्होंने साढ़े ग्यारह हजार रुपए देकर निजी एंबुलेंस बुलाई और से शव को राजस्थान के बाड़मेर ले गए।
