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बैलेट पेपर से चुनाव की मांग पर प्रदर्शन में कम भीड़? दिल्ली से जयपुर तक विरोध की तस्वीरों ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली: बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली समेत कई शहरों में प्रदर्शन का आह्वान किया गया। इस अभियान से जुड़े आयोजकों ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। हालांकि, सामने आई कुछ तस्वीरों और रिपोर्टों में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या अपेक्षा से कम बताई गई।

इस विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अधिवक्ता प्रशांत भूषण, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई लोगों के नाम सामने आए थे। प्रदर्शन का आह्वान देशव्यापी स्तर पर किया गया था। <Cite refs={[“turn104216search12”]}/>

जयपुर में राजभवन घेराव का कार्यक्रम नहीं हो सका

जयपुर में CPI(M), SFI और AICTU की ओर से राजभवन घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित था। खबर में दिए गए विवरण के मुताबिक, शहीद स्मारक पर करीब 100 लोग ही जुट सके। आयोजकों को अधिक लोगों के पहुंचने का इंतजार रहा, लेकिन अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने के कारण राजभवन घेराव का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

दिल्ली में भी प्रदर्शनकारियों की संख्या रही चर्चा में

दिल्ली में भी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें वामपंथी नेता वृंदा करात समेत विभिन्न संगठनों के लोगों के शामिल होने की बात कही गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रदर्शन में 15 से अधिक संगठनों की भागीदारी बताई गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या सीमित रही।

प्रदर्शन स्थल पर सोशल मीडिया के लिए वीडियो और रील बनाने वाले लोगों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। कुछ घंटों तक नारेबाजी और विरोध के बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया।

जिन बड़े चेहरों ने की थी अपील, उनकी मौजूदगी पर सवाल

प्रदर्शन के आह्वान के दौरान प्रशांत भूषण और अभिनेता प्रकाश राज समेत कई चर्चित लोगों के नाम सामने आए थे। दिल्ली में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) से जुड़े लोगों के शामिल होने की भी चर्चा थी। हालांकि, खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, प्रदर्शन स्थल पर इन चर्चित चेहरों की मौजूदगी नजर नहीं आई।

इससे प्रदर्शन के आयोजन, लोगों की भागीदारी और समर्थकों की वास्तविक मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। हालांकि, किसी व्यक्ति की गैरमौजूदगी के पीछे की वजह की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

विपक्षी एकजुटता और जनभागीदारी पर बहस

प्रदर्शन में कम भीड़ जुटने की खबरों के बाद विपक्षी दलों और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले संगठनों की एकजुटता को लेकर बहस तेज हो सकती है। हालांकि, किसी एक प्रदर्शन में कम उपस्थिति के आधार पर देशभर में विपक्षी समर्थन या जनमत के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

नेहा बोरा की याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने की खारिज

इस बीच, दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बॉन्ड भरने संबंधी नोटिस को चुनौती दी थी।

23 अक्टूबर को न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित कार्यवाही में भरोसा किए गए दस्तावेज और सामग्री नेहा बोरा को उपलब्ध कराई जाए। मामला 16 अक्टूबर को दिल्ली में हुए मार्च के बाद जारी नोटिस से जुड़ा था।

निष्कर्ष: चुनाव प्रक्रिया में बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। हालांकि, दिल्ली और जयपुर में सीमित भीड़ की खबरों ने अभियान की जनभागीदारी पर चर्चा छेड़ दी है। प्रदर्शन की व्यापक सफलता या असफलता का आकलन करने के लिए विभिन्न शहरों की भागीदारी और आयोजकों के पक्ष की पूरी जानकारी देखना जरूरी होगा।

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