• July 12, 2026

‘पापा… पापा…’ कहती रही 18 माह की बेटी, नौसेना जवान कुलदीप दिवाच को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

झुंझुनूं। शुक्रवार का दिन राजस्थान के झुंझुनूं जिले के लिए कभी न भूलने वाला बन गया। भारतीय नौसेना के जवान कुलदीप दिवाच (28) की पार्थिव देह जैसे ही तिरंगे में लिपटी उनके पैतृक गांव घरडू पहुंची, पूरा गांव शोक में डूब गया। हर आंख नम थी और हर जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी—देश ने अपना एक वीर सपूत खो दिया।

सबसे भावुक पल तब आया, जब महज 18 माह की उनकी बेटी हर्षिता को पिता के अंतिम दर्शन कराने लाया गया। तिरंगे में लिपटे पिता को देखकर मासूम बार-बार “पापा… पापा…” कहकर पुकारती रही। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।

‘देखो… बेटी बुला रही है, वापस आ जाओ’

जवान की पत्नी संगीता अपने आंसुओं को नहीं रोक सकीं। वह बिलखते हुए बार-बार कहती रहीं, “देखो… बेटी बुला रही है… वापस आ जाओ।” पति को अंतिम विदाई देते-देते वह बेसुध होकर गिर पड़ीं।

मां सुभीता देवी, बड़े भाई और अन्य परिजनों का भी रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे माहौल में सिसकियों के बीच “भारत माता की जय” और “कुलदीप अमर रहें” के नारे गूंजते रहे।

हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई

शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे सूरजगढ़ थाने से जवान कुलदीप दिवाच की पार्थिव देह के साथ तिरंगा यात्रा शुरू हुई। करीब तीन किलोमीटर लंबी इस यात्रा में हजारों लोग और सैकड़ों वाहन शामिल हुए।

रास्ते में सामाजिक संगठनों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर वीर जवान को अंतिम श्रद्धांजलि दी। सुबह करीब 10:30 बजे पार्थिव देह गांव घरडू पहुंची, जहां अंतिम दर्शन के लिए रखी गई।

इसके बाद गांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित श्मशान घाट तक भारतीय नौसेना के बैंड के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ हुआ अंतिम संस्कार

श्मशान घाट पर भारतीय नौसेना की ओर से जवान कुलदीप दिवाच को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सेना के अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार, पिलानी विधायक पितराम सिंह काला, पूर्व सांसद संतोष अहलावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल सुरेश कुमार जांगिड़ समेत बड़ी संख्या में अधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे।

दोपहर करीब एक बजे कुलदीप के बड़े भाई प्रदीप, जो स्वयं भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं, ने अपने छोटे भाई को मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

10 जुलाई: जन्मदिन और अंतिम विदाई का दिन

सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार ने बताया कि 10 जुलाई कुलदीप दिवाच के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाओं का दिन रहा। उनका जन्म 10 जुलाई 1999 को हुआ था। संयोग से इसी तारीख से उनके जीवन की कई यादें जुड़ी रहीं और नियति का ऐसा खेल रहा कि इसी दिन उनका अंतिम संस्कार भी हुआ।

मुंबई में ड्यूटी पर जाते समय हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, 6 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे कुलदीप दिवाच मुंबई में स्कूटी से ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान तेज अंधड़ के कारण सड़क किनारे खड़ा एक पेड़ उनके ऊपर गिर पड़ा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

इलाज के दौरान 9 जुलाई की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। इसके बाद भारतीय नौसेना की टीम उनकी पार्थिव देह को विशेष वाहन से दिल्ली होते हुए सूरजगढ़ लेकर पहुंची।

2018 में भारतीय नौसेना में हुए थे भर्ती

10 जुलाई 1999 को जन्मे कुलदीप दिवाच वर्ष 2018 में भारतीय नौसेना में भर्ती हुए थे। वह लीडिंग एयर ऑर्डनेंस मैकेनिक (LAOM) के पद पर कार्यरत थे और भारतीय नौसेना पोत आईएनएस शिकरा पर तैनात थे।

कुलदीप अपने पीछे मां सुभीता देवी, पत्नी संगीता, 18 माह की बेटी हर्षिता और भारतीय वायुसेना में कार्यरत बड़े भाई प्रदीप को छोड़ गए हैं।

वीर जवान की अंतिम विदाई के दौरान पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी और एक स्वर में कहा—“कुलदीप अमर रहें।”

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