• July 12, 2026

पटना में पहली बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, कई इलाकों में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

पटना। बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को मानसून की पहली बारिश ने ही नगर निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। मामूली बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जल-जमाव की स्थिति पैदा हो गई, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 62 के कई इलाके बारिश के बाद तालाब में तब्दील हो गए। बाहरी बेगमपुर मंडई क्षेत्र में सड़कों पर पानी भर जाने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं, वार्ड संख्या 68 के मथनी तल रेलवे ओवरब्रिज के नीचे स्थित मार्ग पर भी जलभराव होने से स्थानीय निवासियों और राहगीरों की आवाजाही प्रभावित हुई।

मामूली बारिश में ही भर जाता है पानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में थोड़ी सी बारिश होने पर भी जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति कुछ और ही नजर आती है।

हालांकि, जल निकासी के लिए पटना नगर निगम ने प्रभावित क्षेत्रों में दो वाटर पंप लगाए हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

मानसून पूर्व तैयारियों पर उठे सवाल

हर वर्ष मानसून से पहले नगर निगम की ओर से नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं। लेकिन पहली ही बारिश में कई इलाकों में जलभराव की स्थिति ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होने और कई जगह नालों के चोक होने के कारण बारिश का पानी निकल नहीं पाता। इसके अलावा, शहर के कई हिस्सों में अव्यवस्थित निर्माण और जल निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था भी समस्या को और गंभीर बना रही है।

हर साल दोहराई जाती है परेशानी

भारी बारिश के दौरान लोगों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि स्थानीय कारोबार और दैनिक गतिविधियां भी बाधित होती हैं।

नगर निगम की ओर से जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन स्थायी समाधान के अभाव में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन जल निकासी व्यवस्था को लेकर अब तक कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया गया है।

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