October 6, 2026

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राम मंदिर में दान की गई सोने की ‘श्रीरामचरितमानस’ सुरक्षित, ट्रस्ट ने अफवाहों को बताया निराधार

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दान की गई लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण-निर्मित ‘श्रीरामचरितमानस’ को लेकर फैल रही कथित गुमशुदगी की अफवाहों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट बयान जारी कर स्थिति साफ कर दी है। ट्रस्ट ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पवित्र ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है। ट्रस्ट के अनुसार, यह दुर्लभ और बहुमूल्य धार्मिक ग्रंथ वर्तमान में सुरक्षा कारणों से मंदिर परिसर के स्ट्रॉन्ग रूम या लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने कहा कि यह दान पूरी तरह रिकॉर्ड में दर्ज है और इसकी सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि दानदाता एस. लक्ष्मीनारायणन जब भी चाहें, मंदिर आकर स्वयं इस ग्रंथ को देख सकते हैं। यह विवाद तब सामने आया जब पूर्व आईएएस अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई थी कि अप्रैल 2024 में दान की गई स्वर्ण-निर्मित ‘श्रीरामचरितमानस’ को मंदिर परिसर से हटा दिया गया है। उनके अनुसार, शुरुआत में इसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद इसे वहां से हटा दिया गया। उन्होंने मंदिर प्रशासन से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दान की गई वस्तु का ऑडिट कराने की मांग भी की थी। साथ ही यह भी बताया गया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें जानकारी दी थी कि सभी चढ़ावे को स्थायी रूप से प्रदर्शित करना संभव नहीं होता। ट्रस्ट ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर फैलाई जा रही सभी अफवाहें निराधार हैं और जनता को ऐसी भ्रामक खबरों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। ग्रंथ की विशेषता की बात करें तो इसे 10,902 श्लोकों को तांबे के पन्नों पर उकेरकर और 24 कैरेट सोने की परत से तैयार किया गया है। इस भव्य कृति को ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स’ ने निर्मित किया है, जिन्होंने नए संसद भवन के ‘सेंगोल’ का निर्माण भी किया था। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मंदिर में चढ़ावे और दान की प्रक्रिया को लेकर पहले से ही जांच चल रही है। हालांकि ट्रस्ट के ताज़ा बयान के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होने और विवाद थमने की उम्मीद जताई जा रही है।

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