खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, ईरान पर साधा निशाना; 4 और 9 जुलाई की तारीखों पर भी चर्चा
वॉशिंगटन: ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कई बड़े दावे किए, जबकि खामेनेई की अंतिम विदाई में लाखों लोगों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
ट्रंप का दावा, ईरान पर साधा निशाना
एक मीडिया इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए तैयार है और बातचीत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान कुछ समय तक सैन्य कार्रवाई से बचने पर सहमति बनाई है। ट्रंप ने अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़ का जिक्र करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना उनके लिए हैरानी की बात है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो सैन्य कार्रवाई कर सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा क्योंकि भविष्य में बातचीत की संभावना बनी रहनी चाहिए।
शोक सप्ताह के दौरान उमड़ी भीड़
ईरान में 4 से 9 जुलाई तक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। तेहरान समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और विभिन्न धार्मिक एवं सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी जा रही है।
4 और 9 जुलाई की तारीखों का महत्व
खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए चुनी गई तारीखों को भी प्रतीकात्मक रूप से देखा जा रहा है।
- 4 जुलाई को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई, जो अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के साथ मेल खाती है।
- 9 जुलाई को अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम का समापन प्रस्तावित है। यह तारीख इस्लामी परंपरा और शिया समुदाय के लिए विशेष महत्व रखने वाले धार्मिक आयोजनों के निकट होने के कारण भी अहम मानी जा रही है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रम के तहत जनाजे को इराक के पवित्र शहर नजफ और करबला ले जाने की भी योजना है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
क्षेत्रीय हालात पर नजर
खामेनेई के निधन के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा था, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ा। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। हालांकि, हाल के दिनों में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं और तेल एवं गैस आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच भविष्य की संभावित वार्ता और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।