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सतना CHC विवाद: नाबालिग से ओपीडी पर्ची बनवाने का आरोप, प्रशासन पर लापरवाही और बाल श्रम के सवाल

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में नाबालिग से ओपीडी पर्ची बनवाने का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

नाबालिग को ओपीडी काउंटर पर बैठाने का आरोप

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को अस्पताल में ओपीडी पंजीयन काउंटर पर नियमित कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस दौरान एक कर्मचारी ने कथित तौर पर अपने नाबालिग बेटे को पर्ची काटने के लिए काउंटर पर बैठा दिया। घटना की तस्वीर सामने आने के बाद मरीजों और परिजनों ने इसका विरोध किया।

कर्मचारी का बेटा बना पर्ची ऑपरेटर

बताया जा रहा है कि जिस नाबालिग को काउंटर पर बैठाया गया, उसका पिता अस्पताल में मल्टी स्किल कर्मचारी के पद पर कार्यरत है और वह बीएमओ के चालक के रूप में भी कार्य कर रहा है। आरोप यह भी है कि यह निर्णय संबंधित अधिकारी की सहमति से लिया गया।

बाल श्रम कानून के उल्लंघन का आरोप

स्थानीय लोगों ने इसे बाल श्रम कानूनों का संभावित उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र जैसे संवेदनशील स्थान पर किसी नाबालिग को इस प्रकार की जिम्मेदारी देना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि मरीजों की गोपनीयता और व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है।

अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल

मझगवां CHC पहले से ही स्टाफ की कमी और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा है। अब इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि स्टाफ की कमी थी तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन नाबालिग से काम करवाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

BMO का पक्ष

इस मामले पर बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने सफाई देते हुए कहा कि उस समय अस्पताल में मरीजों की भीड़ अधिक थी और कुछ गंभीर मरीजों का पंजीयन जरूरी था। उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारी किसी निजी कारण से अनुपस्थित था, जबकि एक अन्य कर्मचारी चित्रकूट मेले में ड्यूटी पर तैनात था। ऐसे में अस्थायी रूप से नाबालिग से पर्ची बनवाने का निर्णय लिया गया।

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