• June 4, 2026

हिंदी सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री नूतन से जुड़ी 10 दिलचस्प बातें, जिन्होंने अभिनय को दी नई पहचान

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी बेहतरीन अभिनेत्रियों का जिक्र होता है, तो नूतन का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी सहज अदाकारी, सादगी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर उन्होंने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। 4 जून 1936 को जन्मीं नूतन ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और आगे चलकर भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं।

उनकी जन्म जयंती के अवसर पर जानते हैं नूतन से जुड़ी 10 खास बातें, जिन्होंने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शामिल किया।

1. फिल्मी परिवार में हुआ जन्म

नूतन का जन्म 4 जून 1936 को अभिनेत्री शोभना समर्थ और निर्देशक-कवि कुमार सेन समर्थ के घर हुआ था। चार भाई-बहनों में वह सबसे बड़ी थीं। कला और अभिनय का माहौल उन्हें विरासत में मिला था।

2. मां थीं अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री

उनकी मां शोभना समर्थ हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार थीं। खासतौर पर पौराणिक फिल्मों में सीता के किरदार के लिए उन्हें काफी पहचान मिली थी।

3. 14 साल की उम्र में किया डेब्यू

नूतन का फिल्मी सफर साल 1950 में शुरू हुआ। उनकी मां ने फिल्म ‘हमारी बेटी’ का निर्माण किया और इसी फिल्म से नूतन ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।

4. कम उम्र में बटोरी सुर्खियां

महज 14 वर्ष की उम्र में ही नूतन ने अपनी प्रतिभा और व्यक्तित्व से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया था।

5. मिस इंडिया का खिताब किया अपने नाम

साल 1952 में नूतन ने मिस इंडिया प्रतियोगिता जीती और अपने व्यक्तित्व का एक अलग परिचय देश के सामने रखा।

6. ‘सीमा’ से मिली बड़ी पहचान

फिल्मी करियर के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में काम करने के बाद उन्हें असली पहचान 1955 में रिलीज हुई फिल्म ‘सीमा’ से मिली। इस फिल्म के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार मिला।

7. ‘सुजाता’ ने बनाया अभिनय की मिसाल

1959 में रिलीज हुई ‘सुजाता’ नूतन के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। सामाजिक भेदभाव पर आधारित इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें एक और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।

8. ‘बंदिनी’ ने पहुंचाया नई ऊंचाइयों पर

1963 में आई ‘बंदिनी’ में नूतन ने महिला मन की जटिल भावनाओं को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा। यह फिल्म आज भी हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शामिल है।

9. हर तरह के किरदार में छोड़ी छाप

गंभीर और भावनात्मक भूमिकाओं के अलावा नूतन ने रोमांटिक और मनोरंजक फिल्मों में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने देव आनंद के साथ ‘पेइंग गेस्ट’ और राज कपूर के साथ ‘अनाड़ी’ व ‘छलिया’ जैसी सफल फिल्मों में काम किया। ‘सोने की चिड़िया’, ‘तेरे घर के सामने’ और अमिताभ बच्चन के साथ ‘सौदागर’ में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है।

10. चार दशक तक किया दर्शकों का मनोरंजन

1959 में उन्होंने इंडियन नेवी के कमांडर रजनीश बहल से विवाह किया। शादी के बाद भी उनका सफल अभिनय सफर जारी रहा। ‘मिलन’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। अपने करियर में उन्होंने पांच बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान जीता। बाद में ‘मेरी जंग’ और ‘कर्मा’ जैसी फिल्मों में चरित्र भूमिकाओं से भी उन्होंने दर्शकों का दिल जीता।

चार दशक लंबे करियर में नूतन ने 70 से अधिक फिल्मों में काम किया। भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1974 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 21 फरवरी 1991 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी अभिनय विरासत आज भी करोड़ों सिनेप्रेमियों के दिलों में जीवित है।

नूतन की यादगार फिल्में

सीमा, पेइंग गेस्ट, दिल्ली का ठग, आखिरी दांव, सोने की चिड़िया, लाइट हाउस, अनाड़ी, कन्हैया, सुजाता, बंदिनी, खानदान, सरस्वतीचंद्र, सौदागर, मैं तुलसी तेरे आंगन की और मेरी जंग उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हैं।

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