गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग पर गरमाई बहस, योगी आदित्यनाथ बोले- ‘गौ माता को किसी घोषणा की जरूरत नहीं’
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मुस्लिम धर्मगुरुओं द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस मांग का समर्थन नहीं किया गया है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बिजनौर में एक कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गाय भारतीय संस्कृति में माता के समान है और इसके लिए किसी औपचारिक घोषणा की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “गौ हमारी माता है और जन्म-जन्मांतर का हमारा उससे नाता है। क्या मां और पुत्र के रिश्ते को साबित करने के लिए किसी घोषणा की जरूरत होती है?” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गाय को राष्ट्रमाता मानने की भावना भारतीय समाज में पहले से मौजूद है और इसे किसी सरकारी दर्जे की आवश्यकता नहीं है।
केंद्र सरकार ने भी नहीं दिया समर्थन
इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र सरकार फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उठाई थी मांग
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की चर्चा उस समय तेज हुई जब Arshad Madani ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस मांग का समर्थन किया। उनका तर्क था कि यदि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिल जाता है तो गोहत्या और मॉब लिंचिंग जैसे विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर होने वाली हिंसा और राजनीतिक विवादों का स्थायी समाधान तलाशा जाना चाहिए।
पूर्व उपराष्ट्रपति Hamid Ansari ने भी इस विचार पर चर्चा की आवश्यकता जताई थी। उन्होंने कहा था कि यदि इस कदम से सामाजिक तनाव कम हो सकता है, तो इस पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय से बकरीद के अवसर पर गाय की कुर्बानी से बचने की अपील भी की थी।
पश्चिम बंगाल के फैसले के बाद बढ़ी चर्चा
इस मुद्दे को तब और बल मिला जब West Bengal में गोवंश के वध को लेकर नए नियम लागू किए गए। नए प्रावधानों के तहत गाय, बैल, सांड, भैंस या बछड़े के वध के लिए स्थानीय प्रशासन और सरकारी पशु चिकित्सक की अनुमति आवश्यक कर दी गई। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत ने सरकार के निर्णय को बरकरार रखा।
रामभद्राचार्य ने बताया राजनीतिक मुद्दा
हिंदू धर्मगुरु Jagadguru Rambhadracharya ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रचार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि गोवध रोकने का समाधान राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनसमर्थन से निकलेगा, न कि केवल किसी घोषणा से।
बहस जारी, फैसला दूर
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग ने धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर नई बहस को जन्म दिया है। जहां कुछ लोग इसे सामाजिक सौहार्द और विवादों के समाधान का माध्यम मान रहे हैं, वहीं सरकार फिलहाल ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार करती नहीं दिख रही है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।