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महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में बगावत से बढ़ी महायुति-MVA की टेंशन, कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प

महाराष्ट्र में विधान परिषद की 17 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। नामांकन प्रक्रिया के साथ ही महायुति और महाविकास अघाड़ी (MVA) दोनों गठबंधनों के भीतर बगावत के सुर खुलकर सामने आने लगे हैं, जिससे कई सीटों पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर से दोनों राजनीतिक खेमों के नेताओं के बयानों ने चुनावी हलचल को और बढ़ा दिया है। शिवसेना (UBT) के नेता अंबादास दानवे ने भाजपा पर निशाना साधते हुए राजनीतिक संकेत दिए, वहीं शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भाजपा ने शिवसेना (UBT) के “हाथ-पैर काट दिए” और छत्रपति संभाजीनगर जिले में “शिवसेना का सिर काट दिया।”

मंगलवार को महायुति और महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवारों ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। भाजपा, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) वाली महायुति सभी 17 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने ही बागी उम्मीदवार बन गए हैं, जिन्होंने आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सबसे ज्यादा चर्चा चंद्रपुर-वर्धा-गढ़चिरौली सीट को लेकर हो रही है, जहां भाजपा ने अरुण लखानी को उम्मीदवार बनाया है। अरुण लखानी इसलिए भी चर्चा में हैं क्योंकि उनके बेटे सारंग लखानी की शादी राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले की बेटी रेवती से तय हुई है। जून में प्रस्तावित इस शादी के कारण राजनीतिक गलियारों में इस सीट पर खास नजर बनी हुई है।

वहीं, संभाजीनगर-जालना सीट पर भाजपा को टिकट मिलने से शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार नाराज नजर आए। उन्होंने पार्टी लाइन से अलग जाकर अपने बेटे समीर सत्तार को चुनाव मैदान में उतार दिया है, जिससे महायुति की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

महायुति गठबंधन में रायगढ़, यवतमाल, पुणे, अमरावती, नासिक, परभणी, नांदेड और जलगांव जैसी कई सीटों पर बगावत देखने को मिल रही है। कई जगह सहयोगी दलों के नेताओं और उनके परिजनों ने अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया है।

दूसरी ओर, कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) वाले महाविकास अघाड़ी गठबंधन के सामने भी चुनौतियां कम नहीं हैं। स्थानीय निकायों में अपेक्षाकृत कम संख्या होने के बावजूद गठबंधन 15 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। इनमें कांग्रेस 8, शरद पवार गुट 4 और शिवसेना (UBT) 3 सीटों पर मैदान में है। हालांकि नांदेड, भंडारा-गोंदिया, सांगली और सोलापुर सीटों पर बागी उम्मीदवारों ने गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन बगावती उम्मीदवारों का चुनावी समीकरणों पर कितना असर पड़ता है और क्या गठबंधन दल अपने भीतर की नाराजगी को समय रहते संभाल पाते हैं।

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