प्रधानमंत्री मोदी की इज़रायल यात्रा: केनेसेट में ऐतिहासिक भाषण के बाद भारत-इज़रायल संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा, CET पहल से ‘विकसित भारत 2047’ में इज़रायल बड़ा भागीदार बनेगा?
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी 2026 को इज़रायल की संसद (केनेसेट) में दिए ऐतिहासिक भाषण में न केवल पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रचा, बल्कि अमेरिका-ईरान बढ़ते टकराव की पृष्ठभूमि में भारत ने इज़रायल के साथ दो दिनों में एक मजबूत टेक्नोलॉजी और सुरक्षा ढांचा स्थापित किया। यह कदम एक ओर दीर्घकालिक साझेदारी को संस्थागत बनाता है, तो दूसरी ओर भारत को किसी औपचारिक ईरान-विरोधी सैन्य गठबंधन से अलग रखता है। दोनों देशों ने संबंधों को ‘शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी’ (Special Strategic Partnership for Peace, Innovation and Prosperity) का दर्जा दिया है।असली सवाल यह है कि भारत को इससे ठोस क्या मिला और क्या इज़रायल ‘विकसित भारत 2047’ की महत्वाकांक्षा में संरचनात्मक भागीदार बनेगा?
प्रौद्योगिकी सहयोग में बड़ा उछाल
भारत ने प्रौद्योगिकी संबंधों को नई ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ (CET) पहल शुरू की, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर संचालित किया जाएगा। यह बिखरे हुए मंत्रालयी चैनलों से सहयोग को रणनीतिक केंद्र में लाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों को एक ही राजनीतिक रूप से निगरानी वाले ट्रैक में जोड़ा जा रहा है।
भारत ने प्रौद्योगिकी संबंधों को नई ऊंचाई दी है। दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़’ (CET) पहल शुरू की, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर संचालित किया जाएगा। यह बिखरे हुए मंत्रालयी चैनलों से सहयोग को रणनीतिक केंद्र में लाता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों को एक ही राजनीतिक रूप से निगरानी वाले ट्रैक में जोड़ा जा रहा है।
AI पर विशेष एमओयू,
भारत में भारत-इज़रायल साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना और साझा ‘होराइज़न-स्कैनिंग’ तंत्र जैसे कदम दर्शाते हैं कि भारत इज़रायल को अब सिर्फ हथियार आपूर्तिकर्ता नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ की प्रौद्योगिकी महत्वाकांक्षाओं में प्रमुख संरचनात्मक भागीदार मान रही है।
डीप-टेक में संयुक्त नवाचार की नई दिशा
दशकों तक भारत इज़रायली हार्डवेयर खरीदता रहा और उसे सोवियत या पश्चिमी प्लेटफॉर्मों में एकीकृत करता रहा। अब लक्ष्य बदल गया है—इज़रायल की डीप-टेक लैब्स को भारतीय प्रतिभा, पूंजी और औद्योगिक स्केल से जोड़कर संयुक्त बौद्धिक संपदा (IP) पैदा करना, न कि सिर्फ आयातित ‘ब्लैक बॉक्स’ पर निर्भर रहना।
दशकों तक भारत इज़रायली हार्डवेयर खरीदता रहा और उसे सोवियत या पश्चिमी प्लेटफॉर्मों में एकीकृत करता रहा। अब लक्ष्य बदल गया है—इज़रायल की डीप-टेक लैब्स को भारतीय प्रतिभा, पूंजी और औद्योगिक स्केल से जोड़कर संयुक्त बौद्धिक संपदा (IP) पैदा करना, न कि सिर्फ आयातित ‘ब्लैक बॉक्स’ पर निर्भर रहना।
इंडस्ट्रियल R&D को बढ़ावा देने वाले इंडिया-इज़रायल इंडस्ट्रियल R&D एंड डेवलपमेंट फंड (I4F) को मजबूत करने और संयुक्त शोध योजनाओं के लिए अधिक फंड आवंटित करने के फैसले विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों के बीच संस्थागत सह-नवाचार की पाइपलाइन तैयार करने की दिशा में हैं।
रणनीतिक संतुलन और भविष्य की संभावनाएं
यह यात्रा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत की सूक्ष्म कूटनीति को दर्शाती है—इज़रायल के साथ मजबूत तकनीकी और रक्षा साझेदारी बढ़ाना, लेकिन किसी एक पक्षीय गुट में शामिल न होना। CET पहल और विशेष रणनीतिक साझेदारी से इज़रायल ‘विकसित भारत 2047’ में AI, क्वांटम, साइबर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में प्रमुख सहयोगी बन सकता है, जो भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक नवाचार में अहम भूमिका निभाएगा।
यह यात्रा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत की सूक्ष्म कूटनीति को दर्शाती है—इज़रायल के साथ मजबूत तकनीकी और रक्षा साझेदारी बढ़ाना, लेकिन किसी एक पक्षीय गुट में शामिल न होना। CET पहल और विशेष रणनीतिक साझेदारी से इज़रायल ‘विकसित भारत 2047’ में AI, क्वांटम, साइबर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में प्रमुख सहयोगी बन सकता है, जो भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक नवाचार में अहम भूमिका निभाएगा।
दोनों देशों ने 16 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और नवाचार शामिल हैं। यह साझेदारी अब सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित है।