एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की पुस्तक में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ अध्याय पर मांगी माफी, किताब दोबारा लिखी जाएगी; आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार‘ (judicial corruption) से संबंधित विवादित सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद बुधवार को सार्वजनिक माफी मांगी है। एनसीईआरटी ने घोषणा की है कि संबंधित अध्याय को उपयुक्त अधिकारियों के परामर्श से दोबारा लिखा जाएगा और संशोधित पुस्तक शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत में छात्रों को उपलब्ध कराई जाएगी।
इस बीच, मामले में आज (गुरुवार, 26 फरवरी 2026) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ स्वत: संज्ञान (suo motu) मामले की जांच करेगी।
विवाद की वजह क्या बनी?एनसीईआरटी द्वारा हाल ही में जारी कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक “Exploring Society: India and Beyond” (भाग 2) के अध्याय 4 ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ (The Role of Judiciary in our Society) में न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए ‘न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार’ (corruption at various levels of the judiciary) और ‘भारी लंबित मामलों’ (massive backlog) जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इस सामग्री को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष उल्लेख किया, जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को कड़ी नाराजगी जताई। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और गरिमा को ठेस पहुंचाने या उसे बदनाम करने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसे “सोची-समझी और गहरी साजिश” जैसा करार दिया और कहा कि संस्था की अखंडता से कोई समझौता नहीं बर्दाश्त किया जाएगा।
एनसीईआरटी का बयान:
अनजाने में हुई गलतीएनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जारी बयान में कहा, “किताब के संबंधित अध्याय में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री और निर्णय की त्रुटि अनजाने में शामिल हो गई है। एनसीईआरटी न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देता है और उसे भारतीय संविधान का संरक्षक तथा मौलिक अधिकारों का रक्षक मानता है। यह पूरी तरह अनजाने में हुई गलती है।”एनसीईआरटी ने आगे कहा कि नई पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य छात्रों में संवैधानिक साक्षरता, संस्थाओं का सम्मान और लोकतांत्रिक भागीदारी की समझ मजबूत करना है। किसी भी संवैधानिक संस्था के अधिकारक्षेत्र पर सवाल उठाने या उसे कमतर दिखाने का कोई इरादा नहीं था।
परिषद ने तुरंत कार्रवाई करते हुए:
- पुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया।
- वितरण और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी।
एनसीईआरटी ने रचनात्मक सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि आवश्यकतानुसार संशोधन के बाद नई सामग्री तैयार की जाएगी।सुप्रीम कोर्ट की बेंच और सुनवाईमामला ‘In Re: Social Science Textbook for Grade-8 (Part 2) Published by NCERT and Ancillary Issues’ के रूप में दर्ज किया गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ आज इस पर सुनवाई करेगी।
यह घटनाक्रम शिक्षा प्रणाली में संवेदनशील विषयों को शामिल करने की जिम्मेदारी और न्यायपालिका की छवि की रक्षा के बीच संतुलन की बहस को फिर से उजागर करता है। एनसीईआरटी की माफी और किताब वापसी के बावजूद, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से मामले में आगे क्या निर्देश आते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।