• February 11, 2026

यूपी बजट 2026-27: युवाओं के सपनों को पंख और अपराधियों पर नकेल, योगी सरकार ने सुरक्षा और शिक्षा के लिए खोला खजाना

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य के भविष्य यानी युवाओं और प्रदेश की रीढ़ यानी कानून व्यवस्था पर अपना सबसे बड़ा दांव खेला है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा पेश किए गए इस ऐतिहासिक बजट में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि सरकार एक तरफ जहां युवाओं को आधुनिक तकनीक और कौशल से लैस कर स्वावलंबी बनाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को और अधिक संस्थागत और आधुनिक बनाने की तैयारी में है। बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की छवि ‘अपराध प्रदेश’ से बदलकर एक ‘सुरक्षित और सुशिक्षित प्रदेश’ की बनी है।

युवाओं के सशक्तिकरण को केंद्र में रखते हुए सरकार ने कौशल विकास और रोजगार को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। वित्त मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने पिछले पांच वर्षों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस मिशन के तहत अब तक 9.25 लाख युवाओं को अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित कर उन्हें प्रमाणित किया गया है। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि इनमें से 4.22 लाख युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार के अवसर भी प्राप्त हुए हैं। युवाओं की शैक्षणिक और प्रशासनिक महत्वाकांक्षाओं को सहारा देने के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का विस्तार किया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 163 केंद्रों पर 23 हजार से अधिक प्रतिभावान युवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त कोचिंग का लाभ उठा रहे हैं। सरकार ने युवाओं को नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने के लिए 108 आकांक्षात्मक विकास खंडों में ‘मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम’ को भी मजबूती प्रदान की है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करते हुए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत अब तक लगभग 49 लाख 86 हजार टैबलेट और स्मार्टफोन मुफ्त वितरित किए जा चुके हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी तकनीक की दौड़ में पीछे न रहें। खेल और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए 90 हजार मंगल दलों को खेल सामग्री उपलब्ध कराकर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को निखारने का कार्य किया जा रहा है।

कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार ने अपनी उपलब्धियों का व्यापक ब्यौरा पेश किया। वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि जनसामान्य को सुरक्षा प्रदान करना और कानून व्यवस्था की चुनौतियों का डटकर सामना करना सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। सरकार ने वर्ष 2016 के अपराध आंकड़ों की तुलना वर्तमान स्थिति से करते हुए दावा किया कि प्रदेश में संगीन अपराधों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2016 के मुकाबले डकैती के मामलों में 89 प्रतिशत, लूट में 85 प्रतिशत, हत्या में 47 प्रतिशत, बलवा में 70 प्रतिशत और फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में 62 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में पुलिस का इकबाल बुलंद हुआ है और अपराधियों में कानून का भय व्याप्त है।

महिलाओं और वंचित वर्गों की सुरक्षा को लेकर भी बजट में विशेष संवेदनशीलता दिखाई गई है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 की तुलना में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों जैसे हत्या में 48 प्रतिशत, दहेज मृत्यु में 19 प्रतिशत, बलात्कार में 67 प्रतिशत और शील भंग के मामलों में 34 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार, अनुसूचित जाति और जनजाति के उत्पीड़न से जुड़े अपराधों में भी बड़ी गिरावट देखी गई है, जहां हत्या के मामलों में 43 प्रतिशत और आगजनी जैसे अपराधों में 94 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। पुलिस बल को आधुनिक बनाने के लिए बजट में भारी भरकम धनराशि का प्रावधान किया गया है। पुलिस विभाग के गैर-आवासीय भवनों के लिए 1374 करोड़ रुपये और आवासीय भवनों के लिए 1243 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। नवसृजित जनपदों में पुलिस बुनियादी ढांचे के लिए 346 करोड़ रुपये अलग से रखे गए हैं। साथ ही, अग्निशमन सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 200 करोड़ रुपये और बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए 190 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। मिशन शक्ति के तहत महिला पुलिसकर्मियों की गतिशीलता बढ़ाने के लिए नए वाहनों के क्रय हेतु 25 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश एक बड़े बदलाव की ओर अग्रसर है। सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 14,997 करोड़ रुपये की भारी धनराशि प्रस्तावित की है। वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश अब ‘एक जनपद, एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है। वर्तमान में राज्य में कुल 81 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से 45 सरकारी और 36 निजी क्षेत्र द्वारा संचालित हैं। प्रदेश के 60 जिले अब मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं से लैस हो चुके हैं, जबकि शेष 16 जिलों में पीपीपी मॉडल के आधार पर कॉलेजों की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। चिकित्सा सीटों में हुई वृद्धि को सरकार ने अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है। वर्ष 2017 में प्रदेश में एमबीबीएस की मात्र 4,540 सीटें थीं, जिन्हें बढ़ाकर अब 12,800 कर दिया गया है। इसी तरह पीजी सीटों की संख्या भी 1,221 से बढ़कर 4,995 हो गई है। आगामी वर्ष में 14 नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए 1023 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, लखनऊ स्थित कैंसर संस्थान के लिए 315 करोड़ रुपये और गरीब जनता को असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये की विशेष व्यवस्था की गई है।

निष्कर्षतः, योगी सरकार का यह बजट उत्तर प्रदेश को एक ‘सक्षम और सुरक्षित’ प्रदेश बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां एक ओर युवाओं को मुफ्त टैबलेट, कोचिंग और रोजगार के प्रशिक्षण से सशक्त किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस और चिकित्सा ढांचे में भारी निवेश कर जनता के जीवन स्तर को सुधारने का प्रयास किया गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह विकास और अनुशासन के पथ पर बिना रुके आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

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