तमिलनाडु के डिंडीगुल में कौवों की रहस्यमयी मौत से दहशत: स्वास्थ्य विभाग ने बर्ड फ्लू की आशंका को नकारा, पशुपालन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
वेदसंदूर/डिंडीगुल: तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के अंतर्गत आने वाले वेदसंदूर इलाके में पिछले कुछ दिनों से कौवों की अचानक हो रही मौत ने स्थानीय निवासियों के बीच भारी चिंता और भय का माहौल पैदा कर दिया था। इस घटनाक्रम ने न केवल आम जनता को डरा दिया था, बल्कि प्रशासन को भी हाई अलर्ट पर रहने के लिए मजबूर कर दिया था। हालांकि, अब स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए लोगों से शांत रहने की अपील की है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर फिलहाल बर्ड फ्लू यानी एवियन इन्फ्लूएंजा के खतरे से इनकार किया है, जिससे जिले के लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
मामले की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई जब वेदसंदूर के विभिन्न हिस्सों में अचानक कौवे मृत पाए जाने लगे। देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई और सोशल मीडिया के माध्यम से भारी संख्या में पक्षियों की मौत की खबरें प्रसारित होने लगीं। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाते हुए पूरे तमिलनाडु में हाई अलर्ट घोषित कर दिया था। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बड़ी संख्या में कौवों की जान गई है, जिसने सीधे तौर पर बर्ड फ्लू की आशंका को जन्म दिया। बर्ड फ्लू एक ऐसी बीमारी है जो पक्षियों से मनुष्यों में फैल सकती है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर बेहद संवेदनशील बना हुआ था।
विवाद और डर के बीच आज स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि कौवों की मौत की संख्या उतनी अधिक नहीं है जितनी कि अफवाहों और कुछ अपुष्ट खबरों में बताई जा रही थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में केवल एक या दो कौवों की मौत की छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि 8 फरवरी को एक साथ लगभग छह से सात कौवों की मौत हुई थी, जो निश्चित रूप से एक असामान्य घटना थी। इसी घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी कि कहीं यह किसी बड़ी महामारी का संकेत तो नहीं है।
अधिकारियों ने बताया कि 8 फरवरी को जैसे ही उन्हें मृत कौवों की सूचना मिली, तत्काल कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य और पशुपालन विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया। मृत पक्षियों को सुरक्षित तरीके से इकट्ठा किया गया और प्रोटोकॉल के तहत उन्हें दफना दिया गया ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा है कि इंसानी स्वास्थ्य को लेकर फिलहाल डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम अब इन मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। मृत पक्षियों के नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौतें किसी विषैले पदार्थ के सेवन से हुई हैं, भीषण गर्मी के कारण या फिर किसी अन्य स्थानीय बीमारी की वजह से।
उल्लेखनीय है कि 6 फरवरी को ही तमिलनाडु सरकार ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पक्षियों की मौत की सूचना मिलने के बाद आधिकारिक अलर्ट जारी किया था। सरकार ने एवियन इन्फ्लूएंजा की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे। पशुपालन विभाग ने अपने सभी फील्ड अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे न केवल कौवों, बल्कि प्रवासी पक्षियों और कमर्शियल पोल्ट्री फार्मों पर भी कड़ी नजर रखें। विभाग ने निर्देश दिया है कि मुर्गियों या अन्य पक्षियों में किसी भी प्रकार की असामान्य बीमारी या अचानक होने वाली मौत की सूचना तुरंत मुख्यालय को दी जाए।
पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी पक्षियों के आगमन के मौसम में बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए एहतियात बरतना जरूरी है। हालांकि, डिंडीगुल के मामले में अब तक किसी भी पोल्ट्री फार्म से बीमारी की खबर नहीं आई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मृत पक्षियों को सीधे हाथ से न छुएं और यदि कहीं भी पक्षी मृत अवस्था में मिलें, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय नगर निकाय या पशु चिकित्सालय को दें।
फिलहाल, वेदसंदूर में स्थिति नियंत्रण में है और स्वास्थ्य विभाग लगातार इलाके की निगरानी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच रिपोर्ट सामने आएगी, स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। तब तक के लिए अफवाहों पर ध्यान न देने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी गई है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भले ही अभी डरने की बात नहीं है, लेकिन सुरक्षा उपायों में किसी भी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।