• February 11, 2026

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की नई पहल: रामायण काल से जुड़े कोनेश्वर महादेव मंदिर को मिलेगा 1 करोड़ रुपये का विकास पैकेज

लखनऊ, 8 फरवरी 2026: लखनऊ के ऐतिहासिक चौक क्षेत्र में स्थित प्राचीन कोनेश्वर महादेव मंदिर अब नए वैभव की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस पौराणिक धरोहर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इस विकास से मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाएं जुड़ेंगी और लखनऊ की धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।रामायण से जुड़ी कथा और मंदिर की विशेषतापर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि कोनेश्वर महादेव मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ है। गोमती नदी के तट पर स्थित यह स्थान कौण्डिन्य ऋषि का आश्रम था। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, माता सीता को वनवास में छोड़ने के बाद शोकाकुल लक्ष्मण इसी आश्रम में ठहरे थे। कौण्डिन्य ऋषि ने लक्ष्मण को आश्रम में स्थापित शिवलिंग का अभिषेक करने को कहा था। इसी शिवलिंग को कोने में स्थापित होने के कारण कौण्डिन्येश्वर और बाद में कोनेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा।
सावन के महीने में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और दूर-दूर से शिवभक्त दर्शन के लिए आते हैं।क्या-क्या होगा विकास कार्य?मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “मंदिर परिसर में आगंतुकों की सुविधा के लिए निम्न कार्य किए जाएंगे:

  • आधुनिक प्रकाश व्यवस्था
  • स्वच्छ शौचालय ब्लॉक
  • पेयजल की बेहतर व्यवस्था
  • श्रद्धालुओं के लिए विश्राम स्थल
  • सौंदर्यीकरण और साफ-सफाई के अन्य कार्य”

इससे मंदिर की पहुंच और आकर्षण दोनों बढ़ेंगे।लखनऊ की पर्यटन सफलतापर्यटन मंत्री ने बताया कि लखनऊ धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और अवधी व्यंजनों की त्रिवेणी है। हाल ही में यूनेस्को ने लखनऊ को ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा दिया है। पर्यटन विभाग के प्रयासों से वर्ष 2025 में शहर में लगभग 1.5 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, जिसमें बड़ी संख्या विदेशी पर्यटकों की थी। बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक सुविधाएं और सुव्यवस्थित प्रबंधन ने लखनऊ को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।

कोनेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुंचें?

  • चारबाग रेलवे स्टेशन से ऑटो, कैब या सिटी बस द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।
  • मंदिर चौक क्षेत्र में स्थित है, जो शहर के केंद्र में है।
  • देश-प्रदेश से आने वाले भक्तों के लिए दर्शन सुगम हैं।

यह विकास कार्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली नीतियों का हिस्सा है, जिससे लखनऊ की प्राचीन धरोहरों को नई चमक मिल रही है।

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