भारत रूस से तेल आयात बंद करेगा? अमेरिका के दावे के बीच पीयूष गोयल और MEA का रुख साफ नहीं, लेकिन आयात में कमी जारी
नई दिल्ली: भारत-अमेरिका के बीच हालिया अंतरिम ट्रेड डील के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत अब रूस से कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद कर देगा? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 फरवरी 2026 से भारत पर लगे 25% अतिरिक्त (पेनल) टैरिफ को हटा दिया, लेकिन उनके कार्यकारी आदेश में स्पष्ट कहा गया कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात रोकने का वादा किया है। यदि भारत दोबारा खरीदता है, तो टैरिफ फिर से लग सकता है।
हालांकि, भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में रूस का नाम तक नहीं लिया गया। इसमें केवल इतना कहा गया कि भारत अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, टेक्नोलॉजी, एयरक्राफ्ट पार्ट्स, प्रेशियस मेटल्स और अन्य सामान खरीदेगा।
पीयूष गोयल का बयान: MEA स्पष्ट करेगाकेंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से जब रूस से तेल आयात रोकने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, “इस पर विदेश मंत्रालय (MEA) ही स्थिति स्पष्ट करेगा।” गोयल ने यह जरूर जोर दिया कि डील से भारतीय किसानों, MSMEs, कारीगरों और हस्तशिल्प क्षेत्र को कोई नुकसान नहीं होगा।
कृषि क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है और अमेरिकी कृषि उत्पादों पर कोई ड्यूटी छूट नहीं दी गई।MEA का रुख: ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताविदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट किया है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। MEA के अनुसार, भारत बाजार की स्थिति, वैश्विक परिस्थितियों और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाता है। सभी फैसले इसी आधार पर लिए जाते हैं।आंकड़ों में क्या दिख रहा है?
- जनवरी 2026 में भारत ने रूस से औसतन 1.16 से 1.215 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया, जो दिसंबर 2025 से 9-12% कम है।
- यह 2025 के चरम (मिड-2025 में 2 मिलियन bpd से ज्यादा) से काफी कम है, लेकिन रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है (कुल आयात का लगभग 22%)।
- राज्य-स्वामित्व वाली कंपनियां जैसे IOC (598,000 bpd) और BPCL आयात कर रही हैं, जबकि Reliance ने जनवरी में कोई आयात नहीं किया।
- Nayara Energy (Rosneft से जुड़ी) अब भी बड़ा खरीदार है।
- अमेरिका से तेल आयात बढ़ रहा है, लेकिन रूस से पूरी तरह दूरी अभी दूर की कौड़ी लगती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आयात 0.8-1.0 मिलियन bpd तक रह सकता है, लेकिन शून्य नहीं होगा।
क्या होगा आगे?ट्रेड डील से भारत को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। रूसी तेल सस्ता होने के कारण (Brent से $11 तक डिस्काउंट) पूरी तरह छोड़ना महंगा पड़ सकता है। फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है कि वह रूस से तेल खरीदना बंद करेगा। आयात में कमी जरूर जारी है, लेकिन यह बाजार और रणनीतिक फैसलों का नतीजा लगता है, न कि अमेरिकी दबाव का पूरा समर्पण।यह मुद्दा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय संबंधों की परीक्षा ले रहा है।