• February 11, 2026

यूपी की राजनीति में उबाल: मंत्री से भिड़ने वाले चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत को भाजपा का नोटिस, बगावती तेवरों के बीच सपा में जाने की अटकलें तेज

महोबा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड का सियासी पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। प्रदेश सरकार के कद्दावर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ बीच सड़क पर हुई तीखी झड़प और उनका काफिला रोकने के मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने इस अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेते हुए चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से जारी इस नोटिस ने विधायक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उन पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई या पार्टी से निष्कासन की तलवार लटक रही है। वहीं, दूसरी ओर विधायक के तेवर नरम होने के बजाय और भी आक्रामक होते दिख रहे हैं, जिससे उनके जल्द ही पाला बदलकर समाजवादी पार्टी में शामिल होने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

यह पूरा विवाद 30 जनवरी को महोबा में शुरू हुआ था, जब जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह एक आधिकारिक भ्रमण और कार्यक्रम के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने लगभग 100 ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर मंत्री के काफिले का रास्ता रोक लिया था। बताया जा रहा है कि विधायक ने करीब 30 कारों और 20 बाइकों को सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया था, जिससे मंत्री का काफिला पूरी तरह थम गया। विधायक का आरोप था कि उनकी विधानसभा के 100 गांवों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है और जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों की मरम्मत न होने से जनता में भारी रोष है। इस घटना के दौरान मंत्री और विधायक के बीच हुई नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला प्रदेश स्तर पर पहुंच गया।

पार्टी नेतृत्व की ओर से नोटिस मिलने के बावजूद बृजभूषण राजपूत पीछे हटते नजर नहीं आ रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर एक ऐसी पोस्ट साझा की, जिसने राजनीतिक हल्कों में नई बहस छेड़ दी है। विधायक ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों से पूछा कि क्या उन्हें अब बुंदेलखंड के सातों जिलों का दौरा करना चाहिए? उन्होंने लिखा, “क्या मुझे बुंदेलखंड के सातों जिलों के दौरे पर जाना चाहिए… कौन-कौन मेरे साथ चलेगा, अपना नाम और नंबर लिखें।” उनकी इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ समर्थक उनके इस कदम का स्वागत करते हुए उनके साथ चलने को तैयार हैं, वहीं कुछ यूजर्स ने उन्हें सलाह दी है कि वे एक नई पार्टी या संगठन बनाकर अपनी जमीन तलाशें। कुछ विरोधियों ने उन्हें ‘पहले अपना किला मजबूत करने’ की नसीहत दी, जिस पर विधायक समर्थकों और आलोचकों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच विधायक के पिता और पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने अपने बेटे को पार्टी की कार्रवाई से बचाने के लिए काफी प्रयास किए। दो दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर महादेव से अपने बेटे को ‘सद्बुद्धि’ देने की प्रार्थना की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं को नसीहत देते हुए लिखा था कि कोई भी व्यक्ति खुद को पार्टी से ऊपर न समझे। हालांकि, दबाव और विवाद के चलते उन्होंने कुछ ही समय बाद इस पोस्ट को डिलीट कर दिया। इसके बाद बृहस्पतिवार को उन्होंने फिर से अपने बेटे का बचाव करते हुए तर्क दिया कि जब यूजीसी और अन्य मुद्दों पर पार्टी के कई नेताओं ने स्वतंत्र विचार रखे और उन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो बृजभूषण पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? हालांकि, पूर्व सांसद के ये तमाम बचाव कार्य विफल साबित हुए और प्रदेश नेतृत्व ने नोटिस थमा दिया।

पार्टी के भीतर इस नोटिस को लेकर स्थानीय स्तर पर अभी चुप्पी साधी गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा और क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल ने इस संबंध में किसी भी जानकारी से इनकार करते हुए इसे प्रदेश नेतृत्व का मामला बताया है। विधायक बृजभूषण राजपूत से इस मुद्दे पर पक्ष जानने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बृजभूषण राजपूत के अगले कदम को लेकर है। बुंदेलखंड क्षेत्र, विशेषकर चरखारी विधानसभा, लोधी बाहुल्य मानी जाती है। हाल के लोकसभा चुनावों में हमीरपुर-महोबा सीट से समाजवादी पार्टी के अजेंद्र सिंह लोधी की जीत ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र में लोधी मतदाताओं का झुकाव सपा की ओर बढ़ा है। सूत्रों का कहना है कि विधायक के लगातार आते बगावती बयान, जिसमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री तक को रोकने की बात कही थी, उनके सपा में जाने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक समाजवादी पार्टी या विधायक की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके बयानों और सोशल मीडिया की सक्रियता ने भाजपा के साथ उनके भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

अब सबकी निगाहें विधायक द्वारा दिए जाने वाले जवाब और भाजपा प्रदेश नेतृत्व के अगले फैसले पर टिकी हैं। क्या बृजभूषण राजपूत पार्टी में बने रहकर माफी मांगेंगे या फिर बुंदेलखंड के सातों जिलों के दौरे के बहाने किसी नए राजनीतिक सफर की शुरुआत करेंगे, यह आने वाले कुछ दिन साफ कर देंगे।

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