October 7, 2026

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भारत-अमेरिका के बीच ऐतिहासिक 500 अरब डॉलर के व्यापार समझौते पर मुहर: ‘विकसित भारत’ की राह में सुनहरे अध्याय की शुरुआत

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए युग का सूत्रपात करते हुए शनिवार को 500 अरब डॉलर (लगभग 45.29 लाख करोड़ रुपये) के अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बन गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस ऐतिहासिक सौदे की आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ‘स्वर्णिम क्षण’ करार दिया। गोयल ने कहा कि यह समझौता न केवल व्यापारिक आंकड़ों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों के लिए अवसरों के द्वार खुल गए हैं, जिससे रोजगार सृजन और निवेश में भारी उछाल आने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने समझौते के विवरण साझा करते हुए बताया कि शुक्रवार देर रात दोनों देशों के बीच जारी संयुक्त बयान का दुनिया भर के बाजारों ने स्वागत किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का दिन भारत के व्यापारिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा क्योंकि हमारे निर्यातकों के लिए अब दुनिया की सबसे बड़ी 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था ‘मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी’ (सबसे पसंदीदा शुल्क दरों) के साथ खुल गई है। इस वार्ता की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई थी, जिसका मुख्य लक्ष्य प्रति वर्ष 500 अरब डॉलर का निर्यात कारोबार हासिल करना था। गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के दूरदर्शी दृष्टिकोण ने इस भव्य समझौते को वास्तविकता में बदला है।

इस समझौते की सबसे बड़ी विशेषता भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्कों में की गई भारी कटौती है। पीयूष गोयल ने बताया कि कई ऐसी वस्तुएं जिन पर पहले 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगता था, वे अब ‘शून्य शुल्क’ के साथ अमेरिकी बाजार में प्रवेश करेंगी। यह भारतीय निर्यातकों के लिए एक बहुत बड़ी जीत है, विशेष रूप से तब जब चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों पर 35 प्रतिशत और वियतनाम व बांग्लादेश जैसे देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। भारत के लिए टैरिफ में यह रियायत ‘मेक इन इंडिया’ पहल को जबरदस्त मजबूती प्रदान करेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी।

क्षेत्रवार लाभों की चर्चा करते हुए वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि रत्न, आभूषण और फार्मास्युटिकल क्षेत्र इस समझौते के सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरेंगे। भारतीय फार्मा कंपनियों की जेनेरिक दवाओं और औषधीय उत्पादों को अब अमेरिकी बाजार में बिना किसी शुल्क के पहुंच प्राप्त होगी। इसी तरह बंगाल, केरल और महाराष्ट्र से निर्यात होने वाले रत्नों और हीरों पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह समझौता खुशियां लेकर आया है। अब भारतीय कॉफी, आम, चाय, मसाले, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी और विभिन्न प्रकार के फल व सब्जियां बिना किसी टैरिफ के अमेरिका को निर्यात की जा सकेंगी। इसके अलावा अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल, खसखस और खट्टे फलों के रस पर भी पारस्परिक शुल्क समाप्त कर दिया गया है।

पीयूष गोयल ने भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए विपक्ष की आशंकाओं को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार ने किसानों की आजीविका या हितों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी समझौता नहीं किया है। समझौते के तहत भारत ने अपनी कुछ ‘रेड लाइन्स’ (सीमा रेखाएं) निर्धारित की थीं, जिनसे कोई समझौता नहीं किया गया है। भारत में किसी भी प्रकार के आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, मक्का, चावल, गेहूं, बाजरा और रागी जैसी मुख्य खाद्य वस्तुओं पर कोई रियायत नहीं दी गई है ताकि घरेलू किसानों का बाजार सुरक्षित रहे।

इसके अतिरिक्त, भारत में बहुतायत में उगने वाले फलों जैसे केला और खट्टे फलों के साथ-साथ मांस, मुर्गी पालन, डेयरी उत्पाद, सोयाबीन, चीनी और अनाज को भी इस समझौते के प्रभाव से बाहर और पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। काबुली चना, इथेनॉल और तंबाकू जैसे क्षेत्रों को भी कोई राहत नहीं दी गई है ताकि स्वदेशी उद्योगों का संरक्षण किया जा सके। गोयल ने पूरे विश्वास के साथ कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें वैश्विक मंच प्रदान करेगा। रूसी तेल खरीद से जुड़े राजनीतिक सवालों पर उन्होंने गेंद विदेश मंत्रालय के पाले में डालते हुए कहा कि इस पर आधिकारिक रुख वहीं से स्पष्ट किया जाएगा।

यह अंतरिम व्यापार समझौता भारत और अमेरिका के बीच केवल एक व्यावसायिक लेनदेन नहीं है, बल्कि यह दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ते सामरिक और आर्थिक भरोसे का प्रतीक है। पीयूष गोयल ने समापन करते हुए कहा कि विमान के पुर्जों से लेकर मशीनी कलपुर्जों और प्लैटिनम से लेकर घरेलू सजावट की वस्तुओं तक, भारतीय प्रतिभा अब अमेरिकी बाजार में अपनी धमक दिखाएगी। यह समझौता निश्चित रूप से नवाचार, निवेश और करोड़ों नए रोजगार के अवसर पैदा कर भारतीय अर्थव्यवस्था के ‘अमृत काल’ को सफल बनाएगा।

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