• March 6, 2026

बिहार पंचायत चुनाव 2026: ईवीएम से होगा भविष्य का फैसला, नया आरक्षण रोस्टर बदलेगा गांवों का सियासी समीकरण

पटना: बिहार में लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई ‘ग्राम सरकार’ के गठन की सुगबुगाहट अब तेज हो गई है। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि दिसंबर 2026 से पहले हर हाल में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया संपन्न करा ली जाएगी। यह चुनाव बिहार के इतिहास में कई बड़े बदलावों का गवाह बनने जा रहा है। पहली बार बिहार के गांवों में मतदाता बैलेट पेपर की जगह ईवीएम (EVM) का बटन दबाकर अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। इसके साथ ही, एक दशक के लंबे अंतराल के बाद लागू होने वाला नया आरक्षण रोस्टर कई दिग्गजों की सियासी जमीन खिसका सकता है, तो कई नए चेहरों के लिए सत्ता के द्वार खोल सकता है।

एम-3 ईवीएम से होगा मतदान, हाईटेक होगी चुनावी प्रक्रिया

इस बार के पंचायत चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक होना है। अब तक बिहार में पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से होते रहे हैं, जिससे मतगणना में काफी समय लगता था और विवाद की स्थिति बनी रहती थी। राज्य निर्वाचन आयोग इस चुनौती से निपटने के लिए उन्नत तकनीक वाली ‘एम-3’ (M3) ईवीएम यूनिट खरीदने की तैयारी कर रहा है। आयोग ने 32 हजार से अधिक ईवीएम यूनिट खरीदने का लक्ष्य रखा है, जिस पर करीब 64 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

एम-3 ईवीएम की खासियत यह है कि यह पुरानी एम-2 यूनिट की तुलना में अधिक सुरक्षित और क्षमतावान है। एक कंट्रोल यूनिट के साथ 24 बैलेट यूनिट तक जोड़ी जा सकती हैं, जिससे एक साथ 384 प्रत्याशियों के नाम दर्ज करना संभव होगा। चूंकि पंचायत चुनाव में एक मतदाता को मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसे छह अलग-अलग पदों के लिए वोट डालना होता है, इसलिए एम-3 तकनीक इस जटिल प्रक्रिया को आसान बनाएगी। नीतीश सरकार ने चुनावी तैयारियों के लिए 200 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट को मंजूरी दे दी है।

नया आरक्षण रोस्टर: किसकी बढ़ेगी धड़कन, किसे मिलेगा मौका

तकनीकी बदलाव के साथ-साथ इस बार प्रशासनिक स्तर पर ‘आरक्षण रोस्टर’ का बदलाव सबसे अधिक चर्चा में है। बिहार पंचायती राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, आरक्षण की स्थिति प्रत्येक दो क्रमिक चुनावों के बाद बदलनी अनिवार्य है। चूंकि वर्ष 2016 और 2021 के चुनावों में एक ही रोस्टर प्रभावी रहा था, इसलिए 2026 में नया रोस्टर लागू होना तय है। पंचायती राज मंत्री दीपक कुमार ने स्पष्ट किया है कि 10 वर्ष पूरे होने के कारण यह बदलाव कानूनी रूप से आवश्यक है।

नया रोस्टर लागू होने से उन क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर होगा जहाँ वर्षों से एक ही वर्ग का दबदबा रहा है। अधिनियम के तहत, जहाँ पहले सामान्य वर्ग के लिए सीटें थीं, वे अब आरक्षित हो सकती हैं, और आरक्षित सीटों को सामान्य किया जा सकता है। इससे समाज के उन वर्गों को नेतृत्व का अवसर मिलेगा जो अब तक मुख्यधारा से दूर थे। आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर जिलाधिकारियों द्वारा किया जाएगा, हालांकि कुल आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

परिसीमन पर लगा ब्रेक: 30 साल पुराने ढांचे पर ही होंगे चुनाव

भले ही तकनीक और आरक्षण बदल रहे हों, लेकिन पंचायतों का भूगोल इस बार भी पुराना ही रहेगा। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि बढ़ती आबादी के हिसाब से पंचायतों का नया परिसीमन (Delimitation) किया जाए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता लगातार नई पंचायतों के गठन की वकालत कर रहे थे। उनका तर्क है कि अधिक आबादी वाली पंचायतों का प्रबंधन कठिन होता है, इसलिए उनका बंटवारा जरूरी है।

हालांकि, तकनीकी पेच यह है कि वर्ष 2021 की जनगणना अब तक पूरी नहीं हो सकी है। बिना आधिकारिक जनगणना आंकड़ों के नया परिसीमन करना कानूनी रूप से संभव नहीं है। यही कारण है कि राज्य निर्वाचन आयोग 30 साल पुराने परिसीमन के आधार पर ही चुनाव कराने के लिए मजबूर है। इसका सीधा मतलब यह है कि पंचायतों की संख्या और उनकी सीमाएं वही रहेंगी जो पिछले चुनाव में थीं।

वेबकास्टिंग और कम चरणों में चुनाव की तैयारी

ईवीएम के इस्तेमाल का एक बड़ा लाभ यह होगा कि इस बार चुनाव के चरणों में कटौती की जा सकती है। 2021 में हुए चुनाव 11 चरणों में चले थे, जिससे प्रशासनिक मशीनरी पर भारी बोझ पड़ा था। ईवीएम के कारण मतगणना तेज होगी, जिससे आयोग चरणों की संख्या कम करने पर विचार कर रहा है। इसके अलावा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा चुनावों की तर्ज पर सभी संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर वेबकास्टिंग कराई जाएगी। निर्वाचन आयोग मुख्यालय से सीधे बूथों की निगरानी की जा सकेगी, जिससे बूथ कैप्चरिंग और धांधली की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

ढाई लाख से अधिक पदों पर होगा घमासान

बिहार पंचायत चुनाव 2026 के तहत कुल 2,55,379 पदों के लिए मतदान होगा। इनमें सबसे अधिक संख्या पंच और वार्ड सदस्यों की है, जिनके लिए 1,13,307-1,13,307 पद निर्धारित हैं। गांव की सरकार के मुख्य चेहरों यानी मुखिया और ग्राम कचहरी सरपंच के लिए 8,053-8,053 पदों पर चुनाव होगा। इसके अलावा, प्रखंड स्तर पर पंचायत समिति सदस्य के 11,497 पद और जिला स्तर पर जिला परिषद सदस्य के 1,162 पदों के लिए उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाएंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायती राज विभाग ने जमीनी स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण से लेकर ईवीएम की हैंडलिंग के लिए कर्मियों के प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार की जा रही है। बिहार के ग्रामीण अंचलों में यह चुनाव न केवल विकास के दावों की परीक्षा होगा, बल्कि ईवीएम और नए आरक्षण रोस्टर के साथ यह एक आधुनिक और समावेशी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नई मिसाल भी पेश करेगा।

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