सुप्रीम कोर्ट में बंगाल SIR सुनवाई LIVE: ममता बनर्जी खुद पेश होकर दलीलें दे सकती हैं – अपडेट्स
- प्रक्रिया में पुरानी कट-ऑफ तारीखों (जैसे 2002) के आधार पर दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो आम नागरिकों के लिए मुश्किल है।
- “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के नाम पर एल्गोरिदम का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे मनमाने ढंग से नाम कट रहे हैं।
- कुछ विधानसभा क्षेत्रों में असमान रूप से ज्यादा नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर अल्पसंख्यक और गरीब वर्गों के।
- मतदाताओं को पर्याप्त सुरक्षा और सुनवाई का मौका नहीं दिया जा रहा है।
SIR क्या है?
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल समेत कुछ राज्यों में SIR शुरू किया है, ताकि मतदाता सूची में डुप्लिकेट एंट्री, अयोग्य नाम (जिसमें अवैध प्रवासियों के आरोप शामिल हैं) और डेटा असंगतियों को ठीक किया जा सके। हालांकि, TMC और अन्य विपक्षी दल इसे पक्षपातपूर्ण और जल्दबाजी में बताया जा रहा है, जिससे मतदाताओं में डर और भ्रम फैल रहा है।ममता बनर्जी ने पहले प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, प्रेस कॉन्फ्रेंस की और SIR को तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए खतरा है और 2026 के चुनावों से पहले मतदाताओं को नुकसान पहुंचा सकती है।सुनवाई जारी है। कोर्ट से कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है, जो राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों पर असर डाल सकता है।लाइव अपडेट्स के लिए बने रहें – सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में और विकास होते ही सूचित किया जाएगा।