फिच रेटिंग्स ने बजट 2026-27 को सराहा, कहा- मैक्रो स्थिरता और विकास पर मजबूत फोकस, लेकिन राजकोषीय समेकन की रफ्तार धीमी
नई दिल्ली: दिग्गज रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने 1 फरवरी को पेश किए गए भारत के आम बजट 2026-27 पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सकारात्मक लेकिन संतुलित बताया है। फिच ने सोमवार (2 फरवरी 2026) को जारी बयान में कहा कि यह बजट सरकारी कर्ज में क्रमिक कमी के जरिए व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसे मजबूत पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) कार्यक्रम के साथ संतुलित किया गया है ताकि विकास संभावनाएं मजबूत रहें।
फिच रेटिंग्स के डायरेक्टर और भारत के प्राइमरी सोवरेन एनालिस्ट जेरेमी जूक ने कहा, “भारत का बजट मैक्रो स्थिरता बनाए रखने की निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाता है, जिसमें सरकारी कर्ज में धीरे-धीरे कमी का रास्ता अपनाया गया है और विकास संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए मजबूत कैपेक्स कार्यक्रम को बनाए रखा गया है।”
राजकोषीय घाटे में मामूली कमी
बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 4.4 प्रतिशत से थोड़ा कम है। फिच ने कहा कि राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) की रफ्तार बहुत सीमित रहेगी, क्योंकि जीडीपी वृद्धि से ज्यादा समझौता किए बिना घाटे में और कमी लाना कठिन होता जा रहा है। सरकार ने ज्यादा कड़े समेकन की बजाय कैपेक्स को जीडीपी के 3.1 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत स्थिर रखने का विकल्प चुना है, जो निजी निवेश की सुस्त गति की भरपाई करने की कोशिश को दर्शाता है।
बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 4.4 प्रतिशत से थोड़ा कम है। फिच ने कहा कि राजकोषीय समेकन (fiscal consolidation) की रफ्तार बहुत सीमित रहेगी, क्योंकि जीडीपी वृद्धि से ज्यादा समझौता किए बिना घाटे में और कमी लाना कठिन होता जा रहा है। सरकार ने ज्यादा कड़े समेकन की बजाय कैपेक्स को जीडीपी के 3.1 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत स्थिर रखने का विकल्प चुना है, जो निजी निवेश की सुस्त गति की भरपाई करने की कोशिश को दर्शाता है।
मजबूत जीडीपी वृद्धि से सकारात्मक प्रभाव
एजेंसी ने कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि भारत के कई संप्रभु ऋण मानकों में सकारात्मक गति ला रही है। यदि यह बनी रहती है, तो बाकी राजकोषीय चुनौतियों के बावजूद समय के साथ देश की ऋण खाका में सुधार हो सकता है। फिच ने हालिया सुधारों की गति को आगे बढ़ाने से निजी निवेश में तेजी आने और भारत की संभावित वृद्धि को ज्यादा मजबूती मिलने की उम्मीद जताई है। हालांकि, बजट में किसी बड़े पैमाने के सुधार की विशेष घोषणा नहीं हुई, लेकिन फिच को आगे विनियमन में ढील देने के एजेंडे पर और सुधारों की उम्मीद है।
एजेंसी ने कहा कि मजबूत जीडीपी वृद्धि भारत के कई संप्रभु ऋण मानकों में सकारात्मक गति ला रही है। यदि यह बनी रहती है, तो बाकी राजकोषीय चुनौतियों के बावजूद समय के साथ देश की ऋण खाका में सुधार हो सकता है। फिच ने हालिया सुधारों की गति को आगे बढ़ाने से निजी निवेश में तेजी आने और भारत की संभावित वृद्धि को ज्यादा मजबूती मिलने की उम्मीद जताई है। हालांकि, बजट में किसी बड़े पैमाने के सुधार की विशेष घोषणा नहीं हुई, लेकिन फिच को आगे विनियमन में ढील देने के एजेंडे पर और सुधारों की उम्मीद है।
वृद्धि अनुमान
फिच ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एजेंसी का मानना है कि बजट विकास के लिए ब्रॉडली न्यूट्रल (तटस्थ) है, लेकिन कैपेक्स पर जोर से निकट और मध्यम अवधि में आर्थिक संभावनाओं को सहारा मिलेगा।यह प्रतिक्रिया बजट पेश होने के एक दिन बाद आई है, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैपेक्स को मजबूत बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन का रास्ता अपनाया है। फिच की यह टिप्पणी भारत की क्रेडिट रेटिंग (BBB-) के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
फिच ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। एजेंसी का मानना है कि बजट विकास के लिए ब्रॉडली न्यूट्रल (तटस्थ) है, लेकिन कैपेक्स पर जोर से निकट और मध्यम अवधि में आर्थिक संभावनाओं को सहारा मिलेगा।यह प्रतिक्रिया बजट पेश होने के एक दिन बाद आई है, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैपेक्स को मजबूत बनाए रखते हुए राजकोषीय अनुशासन का रास्ता अपनाया है। फिच की यह टिप्पणी भारत की क्रेडिट रेटिंग (BBB-) के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।