भारतीय तटरक्षक बल का स्वर्णिम अध्याय: 50 वर्षों के शौर्य और सुरक्षा का गौरवशाली सफर
नई दिल्ली: भारत की विशाल समुद्री सीमाओं के सजग प्रहरी, भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के लिए 1 फरवरी 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों से दर्ज होने जा रहा है। अपनी स्थापना के पांच दशक पूरे करते हुए यह बल अपना 50वां स्थापना दिवस यानी ‘गोल्डन जुबली’ मनाने की तैयारी कर रहा है। वर्ष 1977 में एक बेहद छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह सफर आज भारत की समुद्री संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक अभेद्य दीवार बन चुका है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्र के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए बल की उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों का खाका पेश किया गया है, जो भारत के ‘नीली अर्थव्यवस्था’ (Blue Economy) के सपनों को नई उड़ान देने वाला है।
भारतीय तटरक्षक बल की विकास यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं है। 1 फरवरी 1977 को जब इस बल की नींव रखी गई थी, तब इसके पास मात्र सात सरफेस प्लेटफॉर्म (सतही जहाज) थे। उन सीमित संसाधनों के साथ भारत की हजारों किलोमीटर लंबी तटरेखा की सुरक्षा करना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन समय के साथ तकनीकी विकास और रणनीतिक कौशल के बल पर आज यह इकाई 155 अत्याधुनिक जहाजों और 80 विमानों के विशाल बेड़े के साथ दुनिया के सबसे शक्तिशाली तटरक्षक बलों में से एक बन चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक संख्यात्मक वृद्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
इस स्वर्णिम अवसर पर तटरक्षक बल ने अपनी भविष्यगामी योजनाओं का भी खुलासा किया है। ‘अमृत काल’ के विजन को ध्यान में रखते हुए बल ने वर्ष 2030 तक अपनी क्षमता को और अधिक विस्तार देने का लक्ष्य रखा है। इस विस्तार योजना के तहत बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़ाकर 200 और विमानों की संख्या 100 तक ले जाने का लक्ष्य है। यह आधुनिकीकरण न केवल तस्करी और अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका को भी सुदृढ़ करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस यात्रा को याद करते हुए बताया कि स्थापना के बाद से अब तक बल ने संकट के समय में 11,800 से अधिक लोगों की जान बचाई है, जो उनके ध्येय वाक्य ‘वयम रक्षामः’ (हम रक्षा करते हैं) को चरितार्थ करता है।
भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका केवल युद्धकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि शांति काल में इसकी जिम्मेदारियां और भी व्यापक हो जाती हैं। समुद्री कानून प्रवर्तन से लेकर तटीय सुरक्षा, खोज और बचाव अभियान, समुद्री पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहायता जैसे मोर्चों पर बल ने खुद को साबित किया है। हाल के दिनों में केरल तट से दूर हुई तीन प्रमुख समुद्री घटनाओं के दौरान तटरक्षक बल की त्वरित कार्रवाई ने बड़े जान-माल के नुकसान को टाला। इसके अलावा, लक्षद्वीप के दुर्गम क्षेत्रों में चलाए गए साहसी बचाव अभियानों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना के साथ किए गए बेजोड़ समन्वय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय समुद्री सुरक्षा तंत्र अब पूरी तरह से एकीकृत और चाक-चौबंद है।
आधुनिक तटरक्षक बल की एक बड़ी पहचान ‘नारी शक्ति’ का सशक्तिकरण भी है। यह बल गौरव के साथ महिलाओं को समुद्र, आसमान और जमीन पर आधारित सभी भूमिकाओं में समान अवसर प्रदान करता है। आज तटरक्षक बल की महिलाएं न केवल विमान उड़ा रही हैं, बल्कि जहाजों की कमान संभालने और तकनीकी संचालन में भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इस समावेशी दृष्टिकोण ने संगठन के भीतर एक सकारात्मक और सम्मानजनक माहौल तैयार किया है, जो नई पीढ़ी की युवतियों को रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सागर’ (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) और ‘महासागर’ (MAHASAGAR) जैसे विजन को धरातल पर उतारने में तटरक्षक बल एक मुख्य स्तंभ की तरह कार्य कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समग्र उन्नति सुनिश्चित करने के लिए बल निरंतर पड़ोसी देशों के साथ मिलकर युद्धाभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। समुद्री पर्यावरण की रक्षा और तेल रिसाव जैसी आपदाओं से निपटने में बल की विशेषज्ञता ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विश्वसनीय साझेदार बनाया है।
50वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रमों से पूर्व देश के संवैधानिक नेतृत्व ने बल की सराहना की है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने अपने शुभकामना संदेशों में तटरक्षक बल के जवानों और उनके परिवारों के त्याग और समर्पण को सलाम किया है। रक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि तटरक्षक बल ने पिछले 50 वर्षों में जिस तरह से भारतीय तटों को सुरक्षित रखा है, उस पर पूरे राष्ट्र को गर्व है।
जैसे-जैसे 1 फरवरी की तारीख नजदीक आ रही है, दिल्ली से लेकर कोच्चि और मुंबई से लेकर पोर्ट ब्लेयर तक, तटरक्षक बल के विभिन्न केंद्रों पर गौरवशाली इतिहास की झलकियां देखी जा सकती हैं। यह 50वां वर्ष केवल बीते हुए कल की सफलता का उत्सव नहीं है, बल्कि एक सुरक्षित और समर्थ भारत के उज्जवल भविष्य का संकल्प भी है। भारत की समुद्री सीमाओं के ये प्रहरी आज भी उतनी ही मुस्तैदी के साथ तैनात हैं, जितनी कि पांच दशक पहले थे, बस अब उनकी शक्ति और संकल्प कई गुना बढ़ चुका है।