• January 31, 2026

महाराष्ट्र निकाय चुनाव: बीएमसी को मिलेगी महिला मेयर, जानिए ठाणे और पुणे समेत सभी नगर निगमों का नया समीकरण

मुंबई: महाराष्ट्र में बहुप्रतीक्षित नगर निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद अब सत्ता के गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा महापौर यानी मेयर पदों की ताजपोशी को लेकर शुरू हो गई है। राज्य के राजनीतिक हृदयस्थल मुंबई (बीएमसी) सहित प्रदेश की 26 महानगरपालिकाओं में मेयर पद के लिए आरक्षण की स्थिति अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है। शहरी विकास विभाग द्वारा गुरुवार को मंत्रालय में निकाली गई लॉटरी के बाद यह साफ हो गया है कि देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बीएमसी की कमान इस बार एक महिला मेयर के हाथों में होगी। इस घोषणा के साथ ही भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) गठबंधन के भीतर संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर हलचल तेज हो गई है।

महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निगमों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये निकाय न केवल स्थानीय विकास बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए वोट बैंक की नींव भी तय करते हैं। लॉटरी प्रक्रिया के बाद अब विभिन्न श्रेणियों जैसे अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के लिए पद आरक्षित कर दिए गए हैं, जिसने कई दिग्गजों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं तो कई नए चेहरों के लिए रास्ते खोल दिए हैं।

बीएमसी और नवी मुंबई में महिला राज: सत्ता के नए समीकरण

लॉटरी के नतीजों में सबसे बड़ा अपडेट बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को लेकर आया है। बीएमसी के मेयर पद को ‘ओपन (महिला)’ श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस प्रतिष्ठित पद पर किसी भी वर्ग की महिला की ताजपोशी हो सकती है। पिछले काफी समय से बीएमसी पर नियंत्रण को लेकर जारी खींचतान के बीच अब भाजपा और शिवसेना गठबंधन मिलकर एक महिला चेहरे का चुनाव करेंगे। बीएमसी के अलावा नवी मुंबई महानगरपालिका में भी मेयर पद महिला (ओपन) के लिए आरक्षित किया गया है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई और नवी मुंबई जैसे हाई-प्रोफाइल शहरों में महिला आरक्षण होने से गठबंधन के भीतर उन महिला पार्षदों की अहमियत बढ़ गई है जो लंबे समय से पार्टी के प्रति वफादार रही हैं। इन शहरों में मेयर पद का आरक्षित होना प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को राजनीतिक पार्टियां अब और जोर-शोर से भुनाने की कोशिश करेंगी।

ठाणे में अनुसूचित जाति और कल्याण-डोंबिवली में अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व

मुंबई के पड़ोसी शहर और मुख्यमंत्री के गढ़ माने जाने वाले ठाणे महानगरपालिका में इस बार सामाजिक न्याय का प्रतिबिंब देखने को मिलेगा। ठाणे मेयर का पद अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। यह फैसला राजनीतिक रूप से काफी अहम है क्योंकि ठाणे में पिछले कई वर्षों से राजनीति कुछ विशेष समूहों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब एससी वर्ग से मेयर बनने से दलित राजनीति और स्थानीय समीकरणों में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

वहीं, कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में मेयर पद अनुसूचित जनजाति (एसटी) श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया है। राज्य सरकार के इस फैसले ने यह सुनिश्चित किया है कि महानगरों के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। ठाणे और कल्याण के इन आरक्षणों ने यह भी साफ कर दिया है कि सत्ताधारी गठबंधन को अब अपने भीतर से इन विशेष श्रेणियों के योग्य उम्मीदवारों को आगे लाना होगा।

क्या है लॉटरी सिस्टम और क्यों है यह महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र में मेयर पद के चयन की प्रक्रिया काफी पारदर्शी और दिलचस्प है। शहरी निकाय के नियमों के मुताबिक, सभी नगर पालिकाओं में मेयर पद का वितरण रोटेशन प्रणाली (Rotation System) के आधार पर होता है। इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को बारी-बारी से प्रतिनिधित्व का मौका दिया जाता है। हालांकि, कौन सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, यह पहले से तय नहीं होता। इसके लिए ‘लॉटरी सिस्टम’ का उपयोग किया जाता है।

शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित इस प्रक्रिया में बक्सों से पर्चियां निकाली जाती हैं, जिसके आधार पर आरक्षण तय होता है। जब तक यह आधिकारिक लॉटरी नहीं निकलती, तब तक कोई भी राजनीतिक दल अपने मेयर उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं कर सकता। यह प्रणाली इसलिए बनाई गई है ताकि किसी भी वर्ग का एकाधिकार न रहे और सत्ता का विकेंद्रीकरण हो सके। गुरुवार को हुई इस प्रक्रिया ने राज्य के 26 शहरों की प्रशासनिक दिशा तय कर दी है।

पुणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर: ‘ओपन’ श्रेणी का रोमांच

राज्य के अन्य महत्वपूर्ण शहरों की बात करें तो पुणे, पिंपरी-चिंचवड, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में मेयर पद ‘ओपन’ यानी सर्वसाधारण श्रेणी के लिए रखा गया है। पुणे और नासिक जैसे शहरों में ओपन श्रेणी होने का मतलब है कि यहां मुकाबला बेहद कड़ा होगा। यहां किसी भी जाति या वर्ग का उम्मीदवार मेयर बन सकता है, जिससे अनुभवी और वरिष्ठ पार्षदों के बीच इस पद को पाने की होड़ मच गई है।

विशेष रूप से पुणे में, जहां भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के बीच कड़ी टक्कर देखी जाती रही है, ओपन कैटेगरी होने से कद्दावर नेताओं के लिए मैदान साफ हो गया है। इसी तरह नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में भी स्थानीय क्षत्रप अब अपनी गोटियां फिट करने में जुट गए हैं।

ओबीसी आरक्षण का प्रभाव: नागपुर से कोल्हापुर तक का हाल

महाराष्ट्र की राजनीति में ओबीसी आरक्षण हमेशा से एक संवेदनशील और बड़ा मुद्दा रहा है। इस बार की लॉटरी में कई महत्वपूर्ण शहरों में ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व मिला है। अहिल्यानगर (अहमदनगर), अकोला, चंद्रपुर और जलगांव में मेयर पद ‘ओबीसी महिला’ के लिए आरक्षित किया गया है। इन शहरों में महिलाओं और ओबीसी वर्ग का दोहरा संयोग देखने को मिलेगा।

वहीं, कोल्हापुर, उल्हासनगर और इचलकरंजी जैसे शहरों में मेयर पद ‘ओबीसी’ (महिला/पुरुष) के लिए आरक्षित किया गया है। नागपुर, जो कि सत्ता का एक और बड़ा केंद्र है, वहां मेयर पद ‘ओपन महिला’ श्रेणी में गया है। नागपुर में महिला मेयर का होना स्थानीय राजनीति में नए आयाम जोड़ेगा। इसके अलावा भिवंडी-निजामपुर, मीरा-भाईंदर, नांदेड़-वाघाला और धुले जैसे शहरों में भी महिला (विभिन्न श्रेणियों में) ही शहर की प्रथम नागरिक बनेंगी।

क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक भविष्य की चुनौतियां

महानगरपालिकाओं के इस आरक्षण ने पूरे महाराष्ट्र का एक संतुलित चित्र पेश किया है। जहां एक ओर लातूर जैसे शहर में अनुसूचित जाति (एससी) को नेतृत्व का मौका मिला है, वहीं सांगली-मीरज-कुपवाड़ और सोलापुर जैसे शहरों को ‘ओपन’ श्रेणी में रखा गया है। मालेगांव और अमरावती जैसे शहरों में भी ओपन श्रेणी के तहत चुनाव होंगे।

इस आरक्षण व्यवस्था के बाद अब असली चुनौती राजनीतिक दलों के सामने है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) को अब आरक्षण की शर्तों के भीतर रहते हुए ऐसे चेहरों को चुनना होगा जो न केवल प्रशासनिक क्षमता रखते हों, बल्कि जनता के बीच भी लोकप्रिय हों। विशेष रूप से जहां महिला आरक्षण है, वहां पार्टियों को मजबूत महिला नेतृत्व को आगे लाना होगा। आने वाले कुछ दिनों में अब बैठकों और नामों पर चर्चा का दौर तेज होगा, जिससे यह तय होगा कि महाराष्ट्र के इन 26 प्रमुख शहरों की चाबी किसके हाथ में होगी।

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