• January 31, 2026

असम के कोकराझार में भीड़ हिंसा के बाद सेना का फ्लैग मार्च: बोडो और आदिवासी समुदायों के बीच तनाव, दो की मौत

कोकराझार/गुवाहाटी: असम के कोकराझार जिले में एक सड़क दुर्घटना के बाद भड़की भीड़ हिंसा ने सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया है, जिसके चलते प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी है। जिले के संवेदनशील इलाकों में सेना की चार टुकड़ियां तैनात की गई हैं, जो बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों में फ्लैग मार्च कर रही हैं। यह कार्रवाई उस समय की गई जब दो समुदायों—बोडो और आदिवासियों—के बीच हिंसक झड़पें, आगजनी और पुलिस चौकी पर हमले की खबरें सामने आईं। इस हिंसा में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के साथ सेना की तैनाती के आदेश दिए हैं, ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।

सड़क दुर्घटना से उपजा आक्रोश और लिंचिंग की घटना

हिंसा की शुरुआत सोमवार रात को हुई, जब कोकराझार जिले के करीगांव चौकी के अंतर्गत मानसिंह रोड पर एक सड़क दुर्घटना घटित हुई। गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एक वाहन, जिसमें तीन बोडो समुदाय के व्यक्ति सवार थे, ने दो आदिवासी व्यक्तियों को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना ने मौके पर मौजूद और पड़ोसी गांव के आदिवासियों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ ने वाहन को घेर लिया और उसमें सवार तीनों बोडो व्यक्तियों को बाहर निकालकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं, उग्र भीड़ ने उस वाहन को भी आग के हवाले कर दिया। इस हिंसक हमले (लिंचिंग) में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने मंगलवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया। तीन अन्य घायल वर्तमान में अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। इस घटना की खबर जैसे ही आसपास के इलाकों में फैली, दोनों समुदायों के बीच दशकों पुरानी नृजातीय दरारें एक बार फिर उभर आईं और तनाव जंगल की आग की तरह फैल गया।

हिंसा का विस्तार: राजमार्ग जाम और पुलिस चौकी पर हमला

मंगलवार को स्थिति उस समय और अधिक विस्फोटक हो गई जब दोनों समुदायों के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। करीगांव चौकी के पास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने अवरुद्ध कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया और भीड़ ने एक सरकारी कार्यालय में आग लगा दी। उग्र प्रदर्शनकारियों ने करीगांव पुलिस चौकी को भी निशाना बनाया और वहां पथराव एवं तोड़फोड़ की।

भीड़ को नियंत्रित करने और तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस संघर्ष में कई पुलिसकर्मियों सहित दर्जन भर से अधिक ग्रामीण घायल हुए हैं। पुलिस चौकी पर हुए हमले ने प्रशासन को मजबूर किया कि वह अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग करे। कोकराझार के साथ-साथ पड़ोसी चिरांग जिले में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि हिंसा अन्य क्षेत्रों में न फैले।

सेना की तैनाती और सुरक्षा बलों का फ्लैग मार्च

रक्षा प्रवक्ता ने पीटीआई को जानकारी दी कि जिला प्रशासन के सहयोग से सेना के जवानों ने मंगलवार रात को ही करीगांव और उसके आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में गश्त शुरू कर दी थी। बुधवार को सेना की चार टुकड़ियां क्षेत्र में मौजूद हैं और वे स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बहाली के उपाय (CBM) के तहत फ्लैग मार्च आयोजित कर रही हैं। सेना का उद्देश्य यह संदेश देना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए कहा है कि सेना की तैनाती आवश्यक थी ताकि सुरक्षा का एक मजबूत घेरा बनाया जा सके। वर्तमान में सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान संवेदनशील पॉकेट्स में तैनात हैं और स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय बाजारों में अब भी सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग अपने घरों से निकलने में डर रहे हैं।

राहत शिविरों की स्थापना और पलायन की स्थिति

हिंसा और संभावित हमलों के डर से करीगांव और मानसिंह रोड के आसपास के कई ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने इन विस्थापित लोगों की सहायता के लिए तत्काल कदम उठाए हैं। कोकराझार जिला प्रशासन ने करीगांव हाई स्कूल और ग्वाजनपुरी अमनपारा हाई स्कूल में दो अस्थाई राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में उन लोगों को पनाह दी जा रही है जिनके घरों को नुकसान पहुंचा है या जो अपने गांवों में लौटने से डर रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि राहत शिविरों में भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही, दोनों समुदायों के बुजुर्गों और नेताओं के साथ शांति बैठकें आयोजित करने की कोशिश की जा रही है ताकि आपसी संवाद के जरिए तनाव को कम किया जा सके। प्रशासन ने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है और सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है ताकि कोई भड़काऊ संदेश स्थिति को दोबारा न बिगाड़ सके। आने वाले 48 घंटे कोकराझार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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