• March 18, 2026

77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर जुटेंगे राष्ट्र निर्माण के 10,000 ‘विशेष नायक’, जन भागीदारी के नए संकल्प के साथ सजेगी परेड

नई दिल्ली: भारत अपने 77वें गणतंत्र दिवस के भव्य स्वागत की तैयारियों में डूबा हुआ है। इस वर्ष 26 जनवरी को नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली परेड न केवल सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन होगी, बल्कि यह ‘जन भागीदारी’ के एक नए अध्याय की गवाह भी बनेगी। केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय ने इस बार एक अनूठी पहल करते हुए देशभर से लगभग 10,000 ‘विशेष अतिथियों’ को इस राष्ट्रीय समारोह का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें देश के आम नागरिकों और राष्ट्र निर्माण में मौन योगदान देने वाले नायकों को राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया जा रहा है।

राष्ट्र निर्माताओं का सम्मान: कौन हैं ये विशेष अतिथि?

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन 10,000 विशेष अतिथियों का चयन बेहद सावधानी और विशिष्टता के साथ किया गया है। आमंत्रित मेहमानों की सूची में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने अपने क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य कर समाज और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। इसमें आय और रोजगार सृजन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उद्यमी, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक बदलाव लाने वाले स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाएं, और प्रमुख सरकारी योजनाओं के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले लाभार्थी शामिल हैं।

इसके अलावा, ‘न्यू इंडिया’ की पहचान बन चुके सर्वश्रेष्ठ नवप्रवर्तक (Innovators), शोधकर्ता और स्टार्टअप संस्थापकों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। सरकार का उद्देश्य इन लोगों के संघर्ष और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना है। ये वे लोग हैं जिन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में योगदान दिया है। कर्तव्य पथ पर इन्हें मुख्य मंच के समीप विशेष दीर्घाओं में बैठाया जाएगा, जो अब तक केवल वीवीआईपी और राजनयिकों के लिए आरक्षित मानी जाती थीं।

केवल परेड नहीं, दिल्ली भ्रमण और मंत्रियों से संवाद का अवसर

इन विशेष अतिथियों का अनुभव केवल परेड देखने तक ही सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने उनके लिए एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया है ताकि उनकी दिल्ली यात्रा यादगार बन सके। समारोह के बाद इन अतिथियों को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) ले जाया जाएगा, जहाँ वे देश के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अतिरिक्त, उन्हें ‘प्रधानमंत्री संग्रहालय’ का भ्रमण कराया जाएगा, जो भारत के लोकतांत्रिक इतिहास और अब तक के प्रधानमंत्रियों के योगदान को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित करता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत, इन विशेष अतिथियों को संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे संवाद करने का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। यह इंटरैक्टिव सत्र उन्हें अपनी बात रखने, अनुभव साझा करने और सरकारी नीतियों पर फीडबैक देने का एक मंच प्रदान करेगा। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे नागरिकों और सरकार के बीच की दूरी कम होगी और लोगों में देश के प्रति गर्व की भावना और प्रबल होगी।

नदियों के नाम पर बैठकों का नामांकन: एक सांस्कृतिक जुड़ाव

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में बैठने की व्यवस्था में भी एक बहुत ही रचनात्मक और सांस्कृतिक बदलाव किया गया है। कर्तव्य पथ पर मेहमानों के बैठने के क्षेत्रों (Enclosures) के नाम अब अंकों या अक्षरों के बजाय ‘भारतीय नदियों’ के नाम पर रखे गए हैं। गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी और ब्रह्मपुत्र जैसी पवित्र नदियों के नाम वाली दीर्घाएं भारत की भौगोलिक और आध्यात्मिक एकता का संदेश देंगी। यह बदलाव न केवल विदेशी मेहमानों को भारत की समृद्ध जल विरासत से परिचित कराएगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए अपनी पहचान से जुड़ना आसान बनाएगा। यह पहल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूती प्रदान करती है।

अभेद्य सुरक्षा तंत्र: तकनीक और खुफिया एजेंसियों का पहरा

77वें गणतंत्र दिवस के भव्य आयोजन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को भी अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया गया है। खुफिया एजेंसियों से प्राप्त संभावित आतंकी खतरों की सूचनाओं के मद्देनजर, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे नई दिल्ली जिले को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया है। इस बार सुरक्षा व्यवस्था में ‘प्रौद्योगिकी-आधारित तंत्र’ (Technology-based Security System) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।

कर्तव्य पथ और उसके आसपास के क्षेत्रों में एआई (AI) आधारित फेस रिकग्निशन कैमरे, हाई-रेसोल्यूशन ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा तैनाती के तरीके में भी रणनीतिक बदलाव किए हैं ताकि मेहमानों की सुविधा और सुरक्षा के बीच एक बेहतर संतुलन बना रहे। चप्पे-चप्पे पर कमांडो की तैनाती के साथ-साथ ऊंची इमारतों पर स्निपर्स को भी तैनात किया गया है। पूरी नई दिल्ली को नो-फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है और पैरा-ग्लाइडिंग या हॉट एयर बैलून जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मेहमानों और पर्यटकों के लिए दिल्ली पुलिस की विशेष अपील

सुरक्षा और सुगम यातायात को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने सभी आमंत्रित मेहमानों, टिकट धारकों और आम जनता के लिए एक विस्तृत परामर्श जारी किया है। पुलिस ने अपील की है कि सभी अतिथि अपने निमंत्रण कार्ड या ई-टिकट पर दिए गए निर्देशों को बहुत ध्यान से पढ़ें। निमंत्रण पत्र पर दर्ज गेट नंबर और निर्धारित मार्गों का ही पालन करें ताकि प्रवेश के समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुरक्षा जांच के दौरान किसी भी प्रकार की प्रतिबंधित वस्तु (जैसे माचिस, लाइटर, बैग, कैमरा या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) साथ न लाएं। पार्किंग और परिवहन से संबंधित सटीक जानकारी और नक्शे रक्षा मंत्रालय (Mod.gov.in) और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड कर दिए गए हैं। मेहमानों को सलाह दी गई है कि वे समारोह स्थल पर समय से काफी पहले पहुँचें, क्योंकि भीड़ और सुरक्षा जांच के कारण प्रवेश में समय लग सकता है।

इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह न केवल भारत की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक वैभव की झांकी होगा, बल्कि यह ‘विशेष अतिथियों’ के रूप में उन हजारों भारतीयों के सम्मान का प्रतीक बनेगा जो चुपचाप राष्ट्र निर्माण की ईंट बन रहे हैं।

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