• January 20, 2026

ब्रज में होली की दस्तक: बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का कार्यक्रम घोषित, 24 फरवरी से शुरू होगा रंगों का महाकुंभ

मथुरा/बरसाना: कान्हा की नगरी ब्रज में होली का उल्लास अब अपने चरम पर पहुंचने वाला है। ‘सब जग होरी, जा ब्रज होरी’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए विश्व प्रसिद्ध बरसाना और नंदगांव की लठामार होली का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। आगामी 24 फरवरी से 26 फरवरी तक बरसाना की रंगीली गलियां और नंदगांव का प्रांगण राधा-कृष्ण के अलौकिक प्रेम और भक्ति की जीवंत लीला का साक्षी बनेगा। इस बार भी इस दिव्य उत्सव में शामिल होने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसे देखते हुए मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है।

ब्रज की होली केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। बरसाना की लठामार होली की गूँज पूरी दुनिया में सुनाई देती है, जहाँ गोपियां (हुरियारिनें) प्रेम की लाठियां बरसाती हैं और नंदगांव के हुरियारे (ग्वाल-बाल) ढालों से अपना बचाव करते हैं। इस उत्सव की तैयारियों ने अब गति पकड़ ली है।

चालीस दिवसीय उत्सव: वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है परंपरा

श्रीजी मंदिर के सेवायत रास बिहारी गोस्वामी ने बताया कि बरसाना की होली केवल तीन दिनों का आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक चालीस दिवसीय लंबी परंपरा है। ब्रज में होली का श्रीगणेश माघ शुक्ल पंचमी यानी ‘वसंत पंचमी’ के दिन ही हो जाता है। इस दिन लाड़ली जी (राधारानी) के मंदिर में विधि-विधान के साथ ‘होली का डांडा’ गाड़ा जाता है। इसी दिन से मंदिर में पारंपरिक ‘समाज गायन’ शुरू होता है, जो फाल्गुन पूर्णिमा तक अनवरत चलता रहता है।

उत्सव का दूसरा मुख्य पड़ाव महाशिवरात्रि को आता है। महाशिवरात्रि के दिन जब लठामार होली की ‘प्रथम चौपाई’ (पदों का गायन) मंदिर से निकलती है, तब राधारानी के आंगन की लीला का विधिवत शुभारंभ माना जाता है। इसी दिन से ब्रज के गोस्वामी समाज और श्रद्धालु फाग के गीतों में सराबोर होने लगते हैं।

लड्डू होली से होगा मुख्य उत्सव का आगाज: 24 फरवरी का कार्यक्रम

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, फाल्गुन महोत्सव अपने मुख्य चरण में 24 फरवरी को प्रवेश करेगा। इस दिन बरसाना के श्रीजी मंदिर में ‘लड्डू होली’ का आयोजन किया जाएगा। यह वह दिन होता है जब नंदगांव से होली का आमंत्रण स्वीकार होने की खुशी मनाई जाती है। मंदिर की अटारी से जब भक्तों पर प्रसाद और लड्डू बरसाए जाते हैं, तो पूरा मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठता है। लड्डू और अबीर-गुलाल के मिश्रण से भक्त सराबोर हो जाते हैं और फाग की तान गलियों में गूंजने लगती है।

रंगीली गली में बरसेगी लाठियां: 25 फरवरी को लठामार होली

उत्सव का सबसे प्रतीक्षित दिन 25 फरवरी होगा, जब बरसाना की ऐतिहासिक ‘रंगीली गली’ में लठामार होली खेली जाएगी। इस दिन नंदगांव के हुरियारे अपने सिर पर पगड़ी बांधे और हाथों में ढाल सजाकर राधारानी के गांव बरसाना पहुंचते हैं। दूसरी ओर, बरसाना की हुरियारिनें (गोपियां) घूंघट की ओट में भारी-भरकम लाठियां लेकर उनका स्वागत करती हैं।

जब हुरियारिनें हुरियारों पर लाठियां बरसाती हैं, तो यह दृश्य अद्भुत होता है। यह प्रहार दुश्मनी का नहीं, बल्कि ‘प्रेम का प्रहार’ होता है। पहली लाठी की थाप के साथ ही पूरा बरसाना धाम भक्ति के रस में डूब जाता है। मान्यता है कि इस लीला को देखने के लिए स्वयं देवता भी अदृश्य रूप में उपस्थित रहते हैं।

नंदगांव में प्रेम रस की लीला: 26 फरवरी का आयोजन

बरसाना की लठामार होली के अगले दिन यानी 26 फरवरी को यही दिव्य लीला नंदगांव में आयोजित होगी। इस दिन बरसाना के गोस्वामी समाज के लोग और गोपियां नंदगांव जाती हैं। नंदभवन के प्रांगण में ढोल-नगाड़ों की थाप और फाग गीतों की मधुर धुनों पर बरसाने की गोपियां थिरकती हैं और वहां के हुरियारों के साथ लठामार होली खेलती हैं। यह आदान-प्रदान ब्रज की दो प्रमुख शक्तियों—राधा और कृष्ण—के मिलन और समरसता का प्रतीक है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व: 1569 से चली आ रही परंपरा

ब्रजाचार्य पीठ के प्रवक्ता घनश्याम भट्ट ने इस परंपरा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लठामार होली कोई साधारण खेल नहीं है। यह विक्रम संवत 1569 से चली आ रही एक महान भक्ति परंपरा है। इसे रसिक संत नारायण भट्ट जी द्वारा पुनर्जीवित और व्यवस्थित किया गया था। यह लीला उसी मर्यादा और उल्लास के साथ आज भी निभाई जाती है जैसा कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण और राधा रानी के बीच हुआ करता था। यह होली ऊंच-नीच और जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर केवल प्रेम और भक्ति का संदेश देती है।

प्रशासन और मंदिर समितियों की व्यापक तैयारियां

होली के इस भव्य आयोजन को देखते हुए मथुरा जिला प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। बरसाना की संकरी गलियों में भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए पार्किंग स्थलों को चिन्हित किया गया है और यातायात डायवर्जन की योजना तैयार की गई है।

आयोजन समितियों ने सुनिश्चित किया है कि दर्शनार्थियों को पीने का पानी, प्राथमिक चिकित्सा और उचित रोशनी की सुविधा मिले। मंदिर सेवायत रास बिहारी गोस्वामी के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं ताकि वे बिना किसी असुविधा के राधारानी के आंगन में होली का आनंद ले सकें। स्थानीय प्रशासन ने ‘नो व्हीकल जोन’ और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती का भी निर्णय लिया है।

श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और सावधानी

देश-विदेश के पर्यटक इस उत्सव को अपने कैमरों में कैद करने के लिए अभी से बरसाना पहुंचने लगे हैं। ब्रज की होली में उड़ता हुआ अबीर-गुलाल और टेसू के फूलों का प्राकृतिक रंग वातावरण को जादुई बना देता है। हालांकि, प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु व्यवस्था बनाए रखें और भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखें।

ब्रज की यह होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि एक ऐसा उत्सव है जहाँ भक्त अपने आराध्य के साथ एकाकार हो जाता है। 24 फरवरी से शुरू होने वाला यह रंगों का महाकुंभ एक बार फिर पूरी दुनिया को शांति, सौहार्द और अलौकिक प्रेम का संदेश देगा।

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