• January 19, 2026

मुस्तफिजुर विवाद में कूदे पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन: बीसीसीआई के फैसले का किया समर्थन, कहा- ‘देशहित सर्वोपरि’

नई दिल्ली/कोलकाता: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के मौजूदा सीजन में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से रिलीज किए जाने का मामला अब एक बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल विवाद में बदल चुका है। जहां एक तरफ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दे रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट जगत से बीसीसीआई (BCCI) को बड़ा समर्थन मिला है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बोर्ड के स्टैंड की सराहना की है। अजहरुद्दीन का मानना है कि बोर्ड ने यह फैसला परिस्थितियों की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया होगा।

मोहम्मद अजहरुद्दीन का बयान: “बोर्ड ने कुछ गलत नहीं किया”

मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के बाद मचे घमासान के बीच मोहम्मद अजहरुद्दीन ने स्पष्ट रूप से बीसीसीआई का पक्ष लिया है। अजहरुद्दीन ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की घटनाओं और वहां की मौजूदा दुखद स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खेल और राजनीति को अलग रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब स्थितियां नियंत्रण से बाहर हों, तो कड़े फैसले जरूरी हो जाते हैं।

अजहरुद्दीन ने मीडिया से बातचीत में कहा, “बीसीसीआई ने जो भी कदम उठाया है, वह पूरी तरह सही है। बांग्लादेश में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह निश्चित रूप से निंदनीय है और उसे अच्छा नहीं कहा जा सकता।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि बीसीसीआई ने मुस्तफिजुर को रिलीज करने का निर्णय अकेले नहीं लिया होगा। उनके अनुसार, क्रिकेट बोर्ड ने निश्चित रूप से भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ही यह आदेश जारी किया होगा। अजहरुद्दीन का यह बयान उन आलोचकों को जवाब माना जा रहा है जो खेल में राजनीतिक हस्तक्षेप की बात कर रहे थे।

केकेआर से मुस्तफिजुर की विदाई के पीछे की असल वजह

इस पूरे विवाद की पटकथा तब लिखी गई जब आईपीएल नीलामी में कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि देकर खरीदा था। मुस्तफिजुर केकेआर के गेंदबाजी आक्रमण की मुख्य कड़ी माने जा रहे थे, लेकिन अचानक बीसीसीआई के एक निर्देश ने सब बदल दिया। बोर्ड ने फ्रैंचाइजी को स्पष्ट आदेश दिया कि इस खिलाड़ी को तुरंत टीम से रिलीज किया जाए।

इस फैसले के पीछे का मुख्य कारण बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही निरंतर हिंसा को माना जा रहा है। भारत के कई राजनेताओं और सामाजिक संगठनों ने बीसीसीआई से मांग की थी कि जब पड़ोसी देश में भारतीय मूल के लोगों और हिंदुओं के साथ अन्याय हो रहा हो, तो वहां के खिलाड़ियों को भारतीय लीग में करोड़ों रुपये कमाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। बढ़ते दबाव और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए केकेआर ने मुस्तफिजुर को बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिससे बांग्लादेशी क्रिकेट बोर्ड (BCB) और वहां की सरकार तिलमिला उठी है।

बांग्लादेश का पलटवार: विश्व कप मैचों को श्रीलंका ले जाने की मांग

मुस्तफिजुर के निष्कासन ने बांग्लादेश में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खेल मंत्री आसिफ नजरुल ने इस मामले में बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने न केवल मुस्तफिजुर के साथ हुए व्यवहार की निंदा की, बल्कि भारत की मेजबानी में होने वाले टी20 विश्व कप पर भी सवाल उठा दिए हैं। नजरुल ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह आईसीसी (ICC) के समक्ष आधिकारिक मांग रखे कि बांग्लादेश के सभी लीग मैच भारत से हटाकर श्रीलंका में आयोजित किए जाएं।

बांग्लादेश को अपने आगामी विश्व कप के चार लीग मैचों में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। नजरुल का तर्क है कि यदि मुस्तफिजुर जैसे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को भारत में आईपीएल अनुबंध के बावजूद सुरक्षा या राजनीतिक कारणों से बाहर किया जा सकता है, तो बांग्लादेश की पूरी राष्ट्रीय टीम भारत में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकती। खेल मंत्री ने इसे खिलाड़ियों की सुरक्षा का मुद्दा बताते हुए आईसीसी चेयरमैन जय शाह को इस विषय पर पत्र लिखने का निर्देश बोर्ड को दिया है।

राजनयिक तनाव का खेल पर साया

भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ महीनों से द्विपक्षीय संबंध काफी तनावपूर्ण रहे हैं। यह विवाद उसी तनाव की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। बीसीसीआई ने अपने आधिकारिक बयान में “मौजूदा परिस्थितियों और चारों ओर हो रही घटनाओं” का हवाला दिया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को एक कड़ा संदेश देना चाहती है कि वह अपने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

दूसरी ओर, बांग्लादेश सरकार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाकर भारत की ‘सुरक्षित मेजबानी’ की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बीसीसीआई सूत्रों का कहना है कि विश्व कप जैसे बड़े आयोजन का वेन्यू अंतिम समय पर बदलना असंभव है। पाकिस्तान पहले ही अपने मैच श्रीलंका में खेल रहा है, और अब बांग्लादेश की इसी तरह की मांग ने आईसीसी के लिए एक नई सिरदर्दी पैदा कर दी है।

निष्कर्ष: क्रिकेट और कूटनीति का उलझा हुआ मैदान

मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे दिग्गज का बीसीसीआई के समर्थन में आना यह दर्शाता है कि भारतीय क्रिकेट जगत इस मामले में एकजुट है। यह विवाद अब केवल 9.20 करोड़ के एक अनुबंध या एक तेज गेंदबाज तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दो देशों के बीच के कूटनीतिक संबंधों की परीक्षा बन गया है। जहां बांग्लादेश इसे ‘खिलाड़ियों की सुरक्षा’ का नाम दे रहा है, वहीं भारत इसे ‘राष्ट्रीय गरिमा और मानवाधिकारों’ से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आईसीसी इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या इसका असर विश्व कप के सफल आयोजन पर पड़ता है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *